बेजुबानों पर जरा भी रहम नहीं करते इंसान, ऐसे खूनी खेल-P2N

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बेजुबानों पर जरा भी रहम नहीं करते इंसान, ऐसे खूनी खेल-P2N

मजे और उत्तेजक लड़ाई देखने के शौकीनों के लिए सांडों की लड़ाई हर देश में होती है। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन इस खूनी जंग में सांडों की दशा बेहद ह्रदयविदारक हो जाती है।

लड़ाई में उतारने से पहले उन्हें भूखा रखा जाता है। स्टेरायड के इंजेक्शन दिए जाते हैं ताकि उनमें उत्तेजना भरी रहे। उनकी पीठ पर रेत से भरी बोरियां गिराई जाती हैं। ऐन लड़ाई से पहले उनकी आंखों में पेट्रोलियम जैली मल दी जाती है ताकि उन्हें सब कुछ धुंधला दिखाई दे और वो असमंजस में रहें।
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सांडों की लड़ाई खूनी बनाने के लिए इनके सींगों को पैना कर दिया जाता है और खुरों में लोहे के पैक लगा दिए जाते हैं ताकि प्रतिद्वंदी को ज्यादा से ज्यादा चोट पहुंच सके।

दक्षिण भारत में भी कई मौकों पर ये लड़ाई परंपरा के नाम पर करवाई जाती हैं और इन पर करोडो़ं के दांव लगते हैं। अगर कोई सांड चल रही लड़ाई से भागने या दूर होने की कोशिश करता तो उसका मालिक उसे दागकर या चाकुओं से गोदकर मारने का काम करता है।

इस खूनी जंग का अंत तब होता है जब एक सांड मर जाए। ऐसे में दूसरे सांड की दशा भी इतनी खराब हो जाती है कि उसके बचने की गुंजाइश नहीं होती।

नेपाल में हर साल होने वाले देवपोखरी त्योहार में खेल के नाम पर मासूम बकरियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। यहां त्योहार वाले दिन मासूम और निरीह बकरियों को पानी में फैंक दिया जाता है और वहीं पर वीरता दिखाने के नाम पर उन्हें जिंदा ही चीरफाड़ डाला जाता है।

900 साल पुराने इस नेपाली त्योहार के खिलाफ पेटा और नेपाल की एनिमल चैरिटीज ने कई प्रयास किए हैं लेकिन ये अब भी बदस्तूर जारी है।

इस प्रक्रिया में गांव के ही एक तालाब में एक बकरी को फैंक दिया जाता है। अब गांव के ही कुछ युवक उस बकरी को पाने के लिए उसके साथ हाथापाई करते हैं। बकरी को हथियाने के क्रम में लगे दर्जनों लोग उसके हाथ पांव, गर्दन जो भी हाथ में आता है उसे खींचने का प्रयास करते हैं। मिमियाती बकरी की चीखें दर्शकों की सीटियों, तालियों और चीखों में दब जाती है और बकरी दम तोड़ देती है।

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चीन और हांगकांग में कुत्तों की लड़ाई काफी लोकप्रिय हैं। यहां लोग घरों के बाहर और भीतर अपने कुत्तों को महीने तक चेन से बांधकर रखते हैं। उन्हें भूखा और प्यासा रखा जाता है ताकि वो झगड़ालू और रोटी के लिए लालायित रहें।

उन्हें ताकतवर बनाने के लिए ड्रग भी दिया जाता है और उनके निजी अंगों में बिजली के झटके लगाए जाते हैं। इस तरह जानवर इरीटेट होता है और खुलने के बाद सामने वाले प्रतिद्वंदी पर अंधा होकर टूट पड़ता है। इस खूनी जंग में एक कुत्ता मारा जाता है औऱ दूसरा बुरी तरह जख्मी हो जाता है।

सबसे दुखद पहलू ये है कि अगर खूनी जंग में हारने वाला कुत्ता अगर नहीं मरा तो उसका ट्रेनर या मालिक ही उसे लूजर समझ कर मार डालता है।

Khushboo Akhtar

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