एआईएमआईएम पार्टी देशव्यापी पार्टी बनी दिन पर दिन बढता जा रहा है ग्राफ

एआईएमआईएम पार्टी देशव्यापी पार्टी बनी दिन पर दिन बढता जा रहा है ग्राफ

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन अब केवल हैदराबाद में असर रखने वाली पार्टी नहीं रह गई हैं. असर रखने वाली पार्टी नहीं रह गई हैं.बल्कि एआईएमआईएम पार्टी अब पूरे हिंदुस्तान में अपने नाम और काम से जानी जाती है। उसका राजनीतिक दायरा महाराष्ट्र विधानसभा के साथ-साथ देश के कई राज्यों में फल गयी हैं और पार्टी मजबूती के साथ लोगो में अपनी पहचान बना रही हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उनके दो उम्मीदवार चुनकर आए थे जो पार्टी के लिए बडी जीत थी।




एआईएमआईएम के निर्वाचित विधायक इम्तियाज जलील कहते हैं, हम मुस्लिम, दलित और पिछडे वर्गो के लोगों की आवाज संसद औऱ विधान सभाओं तक पहुंचाना चाहते हैं. हम इन लोगों की आवाज बनना चाहते हैं जलील चुनाव जितने से पहले तक समाचार चैनल एनडीटीवी के एक वरिष्ठ रिपोर्टर थे. अब वह सांप्रदायिक पार्टी की छवि वाली पार्टी एआईएमआईएम के विधायक हैं. तो इस पार्टी में शामिल होना कितना कठिन फैसला था? चुनाव मैदान में उतरने के सवाल पर इम्तियाज जलील कहते हैं, यें कोई मुश्किल फैसला नहीं था. ये सोचा समझा निर्णय था. मैं जानता था कि अगर कांग्रेस और एनसीपी में शामिल होता तो कठिनई होती।

अब तक कांग्रेस और राष्ट्रवादी ने मुसलमानों और दलितो को वोट बैंक की तरह से इस्तेमाल किया है लेकिन जब सत्ता में भागीदारी की आती है तो उन्हें अलग रखा जाता है. इससे पहले एआईएमआईएम केवल हैदराबाद और तेलंगाना में चुनाव लडती आई हैं।

महाराष्ट्र में केवल एक बार यानी 2012 में नांदेड नगर पालिका के चुनाव में भाग लिया था जिसमें 11 सीटें मिली थी।




विशेषज्ञों के अनुसार अगर पार्टी मुस्लिम और दलित समुदायों को आकर्षि करने में कामयाब हुई तो इससे कांग्रेस, समाजवदी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पुरानी पार्टीयों को नकसान होगा।

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