दलित IAS का CM शिवराज को करारा जवाब, कहा-अंबेडकरवादी हूं, मौत से नहीं डरता

दलित IAS का CM शिवराज को करारा जवाब, कहा-अंबेडकरवादी हूं, मौत से नहीं डरता

भोपाल। मध्य प्रदेश में दलित आईएएस अधिकारी रमेश थेटे की चिट्ठी से सियासी गलियारों बवाल मच गया है। थेटे के समर्थन कई और आईएएस अधिकारी भी उतर आए हैं। वहीं सरकार ने थेटे को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उनसे एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। नोटिस में थेटे से पूछा गया है कि पत्र को मीडिया में क्यों सार्वजनिक किया गया? उच्च अफसर की ऑडियो रिकार्डिंग क्यों की गई? सरकार को आंदोलन की चेतावनी किसलिए दी? और सीएस के कोई कार्रवाई करने के पहले पत्र को क्यों लीक किया गया?

अंबेडकरवादी हूं, मौत से नहीं डरता

मध्य प्रदेश का ग्रामीण विकास सचिव रमेश थेटे ने सरकार के नोटिस पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह अंबेडकरवादी हैं और उन्हें नोटिस तो क्या मौत से भी डर नहीं लगता है। उन्होंने कहा कि यह नोटिस विकृत मानसिकता का परिचायक है। ऐसा लगता है कि नोटिस देने वाले पीड़ित नहीं बल्कि अपराधी के पक्ष में हैं। थेटे ने कहा कि मैंने रिकॉर्डिंग करके अपराधी को पकड़ा है। इसलिए रिकॉर्डिंग उचित है।




निलंबित IAS कर्णावत ने लिखी CM को लिखी चिट्ठी

रमेश थेटे के समर्थन में निलंबित आईएएस शशि कर्णावत और आईएफएस अफसर आजाद कुमार डबास ने जुलानिया पर तीखा हमला किया है। कर्णावत ने मुख्यमंत्री को थेटे के पक्ष में पत्र लिखा है। थेटे को आरोपों को सही बताते हुए कर्णावत ने कहा कि जुलानिया दलित विरोधी हैं और वह लगातार दलित अधिकारियों और कर्मचारियों का मानसिक शोषण कर प्रताड़ित करते रहते हैं। कर्णावत ने जुलानिया को तत्काल पद से हटाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

IFS डबास ने भी लिखी चिट्ठी

आईएफएस अधिकारी आजाद कुमार डबास ने भी सीएस को पत्र लिखकर जुलानिया के कार्यकाल की जांच कराने की मांग की है। सिस्टम परिवर्तन संगठन के अध्यक्ष डबास ने जुलानिया और प्रमुख अभियंता एमजी चौबे की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे बुंदेलखंड पैकेज की जांच कराने की मांग की है।



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