देवबंद के छात्रों का एलान , मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जायेगा

By / 1 year ago / Islam, Latest Posts, National, News / No Comments
देवबंद के छात्रों का एलान , मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जायेगा





इस्लामी प्रणाली सारी मानवता के लिये राहे नजात है,और उस पर उंगली उठाना और आरोप-प्रत्यारोप करना तारीख व इतिहास को कलंकित करने के बराबर है।

आज सारी दुनिया में इस्लामी कानून को निशाना बनाया जा रहा है, हमारे देश भारत में मुसलमानों के पारिवारिक और घरेलू समस्याओं पर फर्जी चर्चा करके चोर दरवाजे से समान नागरिक संहिता को लागू करने की कोशिश इस देश में मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता को समाप्त करने के बराबर है।

हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के संबंध कुरान और सुन्नत से है, और हम अपनी शरई व्यवस्था में किसी भी दूसरे के हस्तक्षेप को कतई बर्दाश्त करने वाले नहीं है लेकिन इसके लिए हमें कुरान और सुन्नत और उस्वा नबवी को अपना वस्त्र और पैराहन बनाना होगा,इन विचारों का इज़हार कल रात मदारिस ए इस्लामिया देवबंद की स्टूडेंट यूनियन द्वारा ऐतिहासिक स्थान महमूद हाल में आयोजित एक एतिहासिक कन्वेंशन बउनवान मुस्लिम पर्सनल लॉ (मुस्लिम पर्सनल लॉ और कॉमन सिविल कोड क्या है?)में प्रमुख भाषण के दौरान दारुल देवबंद के उस्ताद मौलाना अशरफ अब्बास साहब कासमी ने किया।

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उन्होंने कहा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सारी मानवता के लिए रहमत हैं तो उनका धर्म और उनकी व्यवस्था भी सारी मानवता के लिए रहमत होगी।और शरई मसाइल में इंसानों को जो कठिनाइयों और सख़्तियां दिखती हैं वो उनकी अपनी कोताही के कारण है,और तीन तलाक तो महिलाओं के लिए रहमत और जुल्म से निजात का ज़रिया और एक पाक साफ समाज के निर्माण का साधन है।
और इस्लामी व्यवस्था ने तीन तलाक को मअयूब भी करार दिया है, इसलिए तलाक में STEBY STEP को अनिवार्य घोषित किया गया है।

लेकिन आज केंद्रीय सरकार जिस तरह से तलाक को एक राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर सामने ला रही है, और हलफनामा दाखिल करके को अवैध और गैर शरई साबित करने की कोशिश कर रही है और इसके लिए कुछ इस्लामी देशों को बतौर उदाहरण पेश कर रही है।

जबकि सच ये है कि इन देशों में तीन तलाक को एक नहीं माना जाता बल्कि एक साथ तीन तलाक देने पर सजा दी जाती है। और दूसरी बात यह कि हम मुसलमान किसी देश के अनुयायी नहीं है बल्कि हम व्यवस्था और धर्म के मानने वाले हैं जो मोहम्मद अरबी स.लेकर आए हैं।

लंबे अंतराल तक चले सवाल-जवाब के सिलसिले के दौरान महोदय ने छात्रों द्वारा पूछे गए कई सवालों के उत्तर दिए।उन्होंने बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के संरक्षण के संबंध में बोर्ड जो भी व्यावहारिक कदम होगा हम इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेंगे,बोर्ड द्वारा चलााये जा रहे हस्ताक्षर अभियान को दारुल उलूम देवबंद और मदारिस इस्लामिया देवबंद में सफल बनाया जाएगा।




कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आए मौलाना मुफ्ती अरशद साहब फ़ारूक़ी शिक्षक दारुल ज़कारिया देवबंद ने बड़े ही भावुक अंदाज में छात्रों को मौजूदा मामलों के हवाले से जागरूक किया और मुस्लिम पर्सनल लॉ के बिंदुओं से अवगत कराया,बोर्ड की स्थापना और पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक अवधियों का उल्लेख किया और छात्रों में एक आंदोलन बपा करने की कोशिश की,उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में परिवर्तन कुरान का इनकार है । और कुरान का इंकार करने वाला काफिर है, उन्होंने ने छात्रों को दीनी व मिल्ली, राजनीतिक व सामाजिक, सामूहिक और व्यक्तिगत समस्याओं को जानने और समझने की ताकीद की।

जामियतुल इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी के उस्ताद ए हदीस मौलाना अब्दुल रशीद साहब कासमी बसतवी ने समान नागरिक संहिता के लागू किये जाने को असंभव करार देते हुए कहा कि जिस देश में एक ही धर्म के अनुयायियों में एक राम को भगवान मानता है तो दूसरा रावण को,जहां जाति का इतना गंभीर मतभेद हो।

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