होनी को ‘अनहोनी’… और अनहोनी को जो ‘होनी’ कर दे, वह है ”धोनी”!

होनी को ‘अनहोनी’… और अनहोनी को जो ‘होनी’ कर दे, वह है ”धोनी”!





महेंद्र सिंह धोनी, भारतीय क्रिकेट इतिहास में इस खिलाड़ी का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जा चुका है। इतिहास का सबसे महान कप्तान, एक बेहतरीन फ़िनिशर, खेल को समझने और परखने का अद्भुत अंदाज़ जो उन्हें दूसरों से अलग बनाते हुए करिश्माई छवि में खड़ा करता है।

2 दिसंबर 2005 को भारत की नीली जर्सी में छोटे शहर का लंबा बालों वाला खिलाड़ी जब टीम में आया था तो शायद ही किसी को लगा था कि वह ज़्यादा दिन टिक भी पाएगा। पहले मैच में बिना रन बनाए आउट होना, विकेट के पीछे और विकेट के सामने अपनी तकनीक को लेकर जितनी आलोचना इस क्रिकेटर ने झेली थी, सही मायनों में कोई और खिलाड़ी होता तो उसका आत्मविश्वास टूट जाता। लेकिन झारखंड के इस नौजवान ने धर्म की तरह पूजे जाने वाले क्रिकेट की चमक धमक और अपने ऊपर हो रही आलोचना को हावी नहीं होने दिया बल्कि उसे चुनौती लेते हुए अपने पांचवें मैच में ही पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 123 गेंदो में 148 रनों की पारी खेलते हुए सभी का मुंह बंद कर दिया।

यहां से धोनी ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा, एक साल बाद 2 दिसंबर 2005 को अपने ‘दूसरे घर चेन्नई’ में उन्होंने क्रिकेट के सबसे बड़े फ़ॉर्मेट यानी टेस्ट क्रिकेट में भी पहली बार भारत के लिए खेलने उतरे। बारिश से प्रभावित उस मैच में भारत की पहली पारी सिर्फ़ 167 रनों पर ही ढेर हो गई थी, लेकिन धोनी ने 30 रनों की उपयोगी पारी खेली थी। धोनी टीम इंडिया की ओर से उस मैच में वीरेंदर सहवाग और राहुल द्रविड़ के बाद तीसरे टॉप स्कोरर भी थे।

Facebook,Twitter और Youtube पर हमें फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें- 

धोनी के करियर का टर्निंग प्वाइंट था क्रिकेट का सबसे छोटा फ़ॉर्मेट टी20 का आगमन। भारत ने 1 दिसंबर 2006 को दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय टी20 खेला था, जो ज़ाहिर तौर पर माही का भी पहला टी20 था। इसके बाद 13 सितंबर 2007 को धोनी के करियर ने अचानक नई करवट ली, ये वह वक़्त था जब क्रिकेट के सबसे छोटे फ़ॉर्मेट से टीम इंडिया के दिग्गजों ने अपने नाम वापस ले लिए थे और टीम की कमान दक्षिण अफ़्रीका में होने वाले पहले टी20 वर्ल्डकप के लिए धोनी के कंधों पर दे दी गई थी।

धोनी का अर्जुन अवतार: वीडियो हुआ वायरल

इस चुनौती को माही ने न सिर्फ़ स्वीकार किया बल्कि उस अंजाम तक पहुंचा दिया, जहां का सपना भी शायद ही किसी ने देखा था। धोनी की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को फ़ाइनल में शिकस्त देकर पहले टी20 वर्ल्डकप का बादशाह बन गया था। ये भले ही क्रिकेट का सबसे छोटा फ़ॉर्मेट था, लेकिन धोनी ने देशवासियों के सपने को पंख दे दिया था। और ठीक 4 साल बाद 2011 में धोनी ने वनडे वर्ल्डकप पर भी कब्ज़ा जमा लिया था, 1983 के बाद भारत दूसरी बार 50-50 ओवर की क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बना था।

फैसले पर डटे रहना ही अच्छे कप्तान की निशानी

धोनी अब एक ब्रांड हो चुके थे, उनके दिमाग़, कुशल नेतृत्व और करिश्माई छवि IIM जैसे संस्थानों के लिए खोज का विषय बन गई थी। धोनी ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भी भारत को विजयी बनाया और एक बार फिर उम्मीद थी कि 2017 में भी माही का मैजिक भारत को इंग्लैंड में होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी का बादशाह बना देगा। लेकिन अभी इंग्लैंड भारत में ही आने वाला था सीमित ओवरों की सीरीज़ के लिए, और इसके ठीक पहले धोनी ने सभी को उसी तरह चौंका दिया जैसे वह बिना देखे विकेट की गिल्लियां उड़ाते हुए चौंकाते हैं। फ़र्क सिर्फ़ इतना था कि गिल्लियां उड़ाते हुए माही को देख ख़ुशी से भारतवासी उछल जाते हैं, लेकिन धोनी के इस फ़ैसले ने मानो क्रिकेट प्रेमियों की ही गिल्लियां बिखेर दी हों।




हालांकि एक खिलाड़ी के तौर पर धोनी टीम इंडिया के साथ खेलते रहने की बात कर रहे हैं। मगर, मैदान पर कप्तान नहीं सिर्फ़ खिलाड़ी के तौर पर धोनी को देखना हम जैसे क्रिकेट फ़ैंस के लिए किसी अनहोनी से कम नहीं है। कप्तान का पर्याय बन चुके धोनी को दिल से सलाम, ये धोनी ही हैं जो इतना बड़ा और साहसिक फ़ैसला पलक झपकते ही ले सकते हैं। यही वजह है कि फिर कहने को दिल कर रहा है, होनी को जो अनहोनी कर दे और अनहोनी को होनी, वह हैं महेंद्र सिंह धोनी।

सैयद की स्याही से…

Khushboo Akhtar

The author didn't add any Information to his profile yet.