सिस्टम के फेलियर ने ली एक मासूम की जान

सिस्टम के फेलियर ने ली एक मासूम की जान

सौरव सिंघल

मथुरा/ ये जो आप देख रहे हैं न ये हमारे सिस्टम के फेलियर को दिखता है . ये मथुरा की राखी थी. इसने आत्महत्या कर ली क्यूंकि ७ महीने से ये प्रशासन और शासन के चक्कर लगा लगा कर हार गयी लेकिन इनके माता पिता के हत्यारों को पकड़ने में प्रशासन को कोई रुचि नही आई । लोकल प्रशासन से लेके, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ तक से गुहार लगाई, धरना दिए, चिठ्ठी लिखीं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई ।




समर्थक तो शासन को बचाने के बहाने ढूंढ ही लेंगे लेकिन किसी को किस कदर मानसिक रूप से तोड़ दिया जाता है यह उसी का एक उदाहरण है । 
मानती हूं की आत्महत्या करना गलत है लेकिन जो टूट जाता है न उसके पास कोई और रास्ता नहीं बचता. उसने चिट्ठी से लेकर धरने तक सब कुछ किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं . जिम्मेदारी शासन की है, जब कोई आपको चिठ्ठी भेज रहा है, धरने पर बैठ रहा है तब भी आपके कान नहीं खुलते. इसका मतलब आप बहरे तो हैं ही, साथ की साथ अंधे भी हो गए हैं कि आपको दिख ही नहीं रहा कुछ…. 
समर्थक बोलते हैं कि बुराई करते रहते हो, शिकायती चिट्ठी लिखो और तब सुनवाई न हो तो बोलो । हां तो समर्थकों, भक्तों,लकड़बग्घों इस पर भी कुतर्क ले आओ और सरकार के बहरेपन को सेफज़ोन प्रोवाइड करो ।




बीजेपी कोई अश्वमेघ जीतने नहीं निकली है जो सारे राज्य जीतने हैं. पहले जो हैं उनकी तो हालत सुधर जाए. योगी जी के पास केरल जाने के लिए तो टाइम है लेकिन इन जैसे मुद्दे सुलझाने के लिए टाइम नहीं है… आप सब अटलबिहारी जी की विरासत का खा रहे हैं.. इन्तजार कीजिये… हर कुत्ते का एक दिन आता है. आप कुछ कर नहीं रहे हैं बस बढ़ावा दिए जा रहे हैं चीजों को.. आत्ममुग्धता बहुत बुरी चीज है जो अब बीजेपी वालो को लग चुकी हैं. अगर आज के यूथ को इस तरह से शासन द्वारा प्रताड़ित किया जायेगा और ऐसे ही हारते रहे तो वो आपको ऐसी जगह उठा के गाड़ देगा जहां से निकल नही पाएंगे ।

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