आजाद मुल्क में सबको अभिव्यक्ति की आजादी : अरशद मदनी

आजाद मुल्क में सबको अभिव्यक्ति की आजादी : अरशद मदनी

जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा है कि मुसीबतों से बचने के लिये अल्लाह की राह पर चलना जरूरी है। मुसलमान ही नहीं, बल्कि सर्वधर्म के लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। यही इस्लाम का पैगाम है।

मंगलवार को पानीपत खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मदरसा इसातुल इस्लाम में जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें पहुंचे जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि नेक कार्य करते रहो, कोई देखे या न देखे, लेकिन ऊपर वाला सब देख रहा है।




विधवाओं, गरीबों, बहन-भाईयों तथा पड़ोसियों को सताने वालों को अल्लाह माफ नहीं करेगा। कयामत के दिन पीड़ित लोग ऐसे जालिमों के दामन पकड़ेंगे। हज नमाज, रोजा, जकात, ही इस्लाम धर्म का नाम नहीं, बल्कि पड़ोसियों, निर्धन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार तथा उनसेे रहम दिली करना भी इस्लाम है। मदरसा बदरूल उलूम गढ़ी दौलत के प्रबंधक मौलाना आकिल ने कहा कि अपने बच्चों को दीनी शिक्षा के साथ साथ दुनियावी शिक्षा भी अवश्य दिलाएं।




मौलाना राशिद कांधलवी ने कहा कि मुल्क का माहौल खराब कराने के लिये कुछ मुट्ठी भर लोेग नफरत फैलाकर देश को तोड़ने की कोशिश
कर रहे हैं। यदि मुल्क पर आंच आएगी, तो मुसलमान पीछे नहीं हटेगा। संचालन कारी अब्दुल वाजिद ने किया।
इसी बीच हजरत मौलाना अरशद मदनी ने मदरसे के पांच छात्रों को पगड़ी बांधकर हाफिज की उपाधि से नवाजा। जलसे में मौलाना फिराजुद्दीन, मौलाना आकिल, मौलाना गुलजार, मौलाना बरकतुल्ला अमीनी, अजमतुल्ला खान, इंतजार अंसारी, माजिद खान, हाफिज साजिद, मास्टर समीउल्लाह आदि मौजूद रहे।

आजाद मुल्क में सबको अभिव्यक्ति की आजादी
शामली। जमीयत उलेमा ए हिंद के शामली में कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सबको भाइचारे से रहना चाहिए। आजाद मुल्क में हर किसी को अभिव्यक्ति की आजादी है। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे मौलाना अरशद मदनी शामली में कैराना रोड स्थित ईदगाह पर पहुंचे।




उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद देश की भलाई के कार्य में लगा हुआ है। इस दौरान एडवोकेट मुस्तफा, मौलाना मोहम्मद इकबाल, मौलाना अय्यूब, मौलाना शौकीन, मौलाना नसीम, मौलाना जाकिर, कारी शमीम, मौलाना आस मोहम्मद, कारी अख्तर, हाजी कुतुबुद्दीन, कारी नौशाद, मौलाना नौशाद, हाफिज बुरहान, मौलाना नजाकत, डाक्टर खुर्शीद अनवर, मोहम्मद उस्मान और उमर सैफ आदि मौजूद रहे।

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