OIC की हुई आपातकालीन बैठक, भारत से मानवाधिकार हनन को रोकने और फ़ौज के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की

ओआईसी की आपातकालीन बैठक , जम्मू-कश्मीर को लेकर जताई चिंता ,भारत से मांग की, पूरी जानकारी के लिए वीडियो ज़रूर देखें।

Share
Written by
पल पल न्यूज़ वेब डेस्क
23 जून 2020 @ 14:21
पल पल न्यूज़ का समर्थन करने के लिए advertisements पर क्लिक करें
Organization of Islamic countries denied Trump's Middle East peace plan

कश्मीर में बढ़ते अत्याचारों को लेकर इस्लामिक संगठन OIC के विदेश मंत्रियों की एक आपातकालीन वीडियो बैठक बुलाई गई थी और इस बैठक में अजरबैजान, नाइजीरिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की सहित जम्मू और कश्मीर के सदस्यों ने भाग लिया।

बता दें कि OIC के कॉन्टैक्ट ग्रुप के विदेश मंत्रियों की आपातकालीन बैठक में कहा गया है कि भारत सरकार की ओर से 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को लेकर जो फ़ैसला लिया गया है और नए डोमिसाइल नियम लागू किए गए हैं, वो संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय क़ानून जिसमें चौथा जिनेवा कंवेंशन भी शामिल है, उसका उल्लंघन है और साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को मानने की भारत की प्रतिबद्धता का भी उल्लंघन है।

वहीं, ओआईसी के महासचिव डॉक्टर यूसुफ़ अल-ओथइमीन ने कहा, “ओआईसी इस्लामी समिट, विदेश मंत्रियों की कौंसिल और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के हिसाब से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकालने को लेकर प्रतिबद्ध है.”

साथ ही OIC ने भारत से मांग की है कि एकतरफ़ा और ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाई रद्ध करे और कश्मीरी अवाम को स्वेच्छापूर्ण तरीक़े से उनके आत्मनिर्णय के अधिकार का संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में जनमत-संग्रह के तहत पालन करने दे।

ओआईसी ने भारत से मानवाधिकार हनन को रोकने की मांग करते हुए कहा है कि फ़ौज के ग़लत इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए जिसके तहत फ़ौज पैलेट-गन का इस्तेमाल करती है। फ़ौज की अभेद घेराबंदी और अमानवीय लॉकडाउन को हटाया जाए। कठोर आपातकालीन क़ानून को भंग किया जाए।

भारत से OIC ने ये भी मांग कि है कि प्रशासित जम्मू-कश्मीर की आबादी में किसी भी प्रकार की संरचनात्मक बदलाव को रोका जाए क्योंकि ये ग़ैर-क़ानूनी हैं और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन है, ख़ासतौर पर चौथे जिनेवा कंवेंशन का।

वेबसाइट पर advertisement के लिए काॅन्टेक्ट फाॅर्म भरें