कठुआ केस: डॉक्टर ने किया अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

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इन दिनों केस की सुनवाई पंजाब के पठानकोट में चल रही है। जिला एवं सत्र जज तेजविंदर सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ अदालत से पठानकोट स्थानांतरित किया था। जिला एवं सत्र कोर्ट ने 8 जून 2018 को इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और हत्या के आरोप तय किए थे।

केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं और अब तक 56 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया। बताया जा रहा है कि इन्हीं एक्सपर्ट ने पीड़ित बच्ची के कपड़ों की जांच की थी।

दुष्कर्म से पहले पीड़िता को खिलाई थी नशे की गोलियां
55वें गवाह के रूप में पेश हुए पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया कि दुष्कर्म करने से पहले बच्ची को नशीली गोलियां खिलाईं गईं थी, जो इतनी तेज थी कि बच्ची की आवाज तक नहीं निकली। नशे की हालत में ही बच्ची से दुष्कर्म किया गया।

डॉक्टरों ने कहा, बच्ची का हुआ था यौन उत्पीड़न, दम घुटने से हुई मौत
डॉक्टर ने कोर्ट को बताया कि बच्ची का यौन उत्पीड़न किया गया था और उसकी मौत दम घुटने से हुई। पोस्टमार्टम करते समय बच्ची के साथ दरिंदगी के जो निशान दिखे, आज तक किसी के साथ ऐसी हैवानियत नहीं देखी थी। डॉक्टरों के बयान से अभियोजन का मामला और मजबूत हुआ है।

बता दें कि जम्मू के कठुआ में 10 जनवरी 2018 को 8 साल की बच्ची लापता हो गई थी। 7 दिनों बाद उसकी लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली। मामले में सात आरोपी हैं- मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, सांझी राम, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार।

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