नबी की सुन्नत ‘हिजामा’ थेरेपी- एजाज खान

नबी की सुन्नत ‘हिजामा’ थेरेपी- एजाज खान





दरअसल हिजमा एक थेरेपी है, जिसमे बिना चीरा और टाँके के इंसान के शरीर में जमा हुआ खून एक ख़ास पदत्ति द्वारा बहार निकाला जाता है।

नबी पाक जब मेराज़ के सफर पर दुनिया से आसमान पर तशरीफ़ ले गए थे तो वापसी में आते वक़्त सातों आसमान के फरिश्तों ने रसूल उल्लाह सल्लाहु अलय्ही वसल्लम को हिजामा कराने का मशिवरा दिया था।

हिजामा थैरेपी (रक्त मोक्षण) हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है। दुनिया के हर हिस्से में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है।

Facebook और  You Tube पर हमें फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें-

इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है।

इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। हाल ही ओलंपिक तैराक फेल्प्स ने यह थैरेपी ली है।




बता दें कि हिजामा सभी रोगों में यह फायदेमंद है। खासतौर पर हर प्रकार के दर्द में। सियाटिका, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महिलाओं में इंफर्र्टिलिटी, माहवारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग-धब्बे और गंजेपन में यह थैरेपी कारगर है।

Nadeem Akhtar

The author didn't add any Information to his profile yet.