हक मांगने के फल में आदिवासी किसानों को मिला FIR नोटीस

हक मांगने के फल में आदिवासी किसानों को मिला FIR नोटीस





हजारीबाग। झारखंड के बड़कागांव में एनटीपीसी और त्रिवेणी सैनिक कंपनी के खिलाफ चिरूडीह में चल रहे कफन सत्याग्रह के 17वें दिन शनिवार तड़के विधायक निर्मला देवी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस और आंदोलनकारियों में भिड़ंत हो गई। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आंसू गैस के गोले छोड़े। आंदोलनकारियों ने भी पथराव किया।

मामला बढ़ने पर पुलिस ने फायरिंग कर दी। इसमें छह लोगों की मौत हो गई। एक किशोर लापता है। झड़प में पुलिस और ग्रामीणों सहित 50 से ज्यादा लोग घायल हैं। विधायक को लोगों ने पुलिस की गिरफ्त से छुड़ा लिया लेकिन वे अभी तक लापता हैं।
पुलिस इस मामले में अब विधायक निर्मला देवी सहित 600 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर इस मामले की जांच करने जा रही है। दरअसल बड़कागांव में एनटीपीसी लगाया जा रहा है। जिन लोगों की जमीन इसके लिए अधिग्रहीत की गई है वे मुआवजे के साथ नौकरी की मांग कर रहे हैं। सरकार इस मांग को पूरा करने के पक्ष में नहीं है।

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आदिवासी किसानों का कहना है कि मुआवजे की राशि खत्म होने के बाद उनका जीवन निर्वहन कैसे होगा। अभी तक वे खेती के जरिए अपने परिवार का पालन करते आए हैं। न खेती रहेगी और न नौकरी तो उनका भविष्य क्या होगा। इसी बात को लेकर दो दिन पहले आंदोलनकारियों पर गोलीबारी की गई।

इस मामले को लेकर जेएनयू के छात्रों ने दिल्ली में झारखंड भवन पर प्रदर्शन बुलाया है। पुलिस के लाठीचार्ज के विरोध में ग्रामीणों ने मृतक आदिवासियों के शव के साथ बड़कागांव मुख्य चौक को जाम कर दिया। ग्रामीणों ने दुर्गा पूजा और मोहर्रम नहीं मनाने का फैसला लिया है। मृतकों की शिनाख्त चेपा खुर्द निवासी मो. मेहताब, डाडी पंचायत के चौकीदार का भतीजा रंजन कुमार सिंदवारी, सोनबरसा के अभिषेक कुमार राय राजेश साव के रूप में हुई है।




वहीं सोनबरसा गांव के मखीरन साव का पुत्र पवन कुमार लापता है। सभी मृतकों के गर्दन, कंधा, सीना और हाथ में गोली लगी है। वहीं दूसरी तरफ विधायक निर्मला देवी का अभी तक पता नहीं चला है। निर्मला देवी ग्रामीणों का साथ दे रही थीं। यहां निषेधाज्ञा लागू कर, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई है।

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