शुरु अल्लाह के नाम पर है जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है

By / 1 year ago / Islam, Latest Posts, News / No Comments
शुरु अल्लाह के नाम पर है जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है

अल्हमदोलिल्ला ही रब्बिल आलिमीन अस्सलातो वस्सलामो अला रसूलेहिल करीम वआला आलेहि वअसहाबिहि अजमईन, अम्मा बाद, मिल्लते इस्लामिया के गय्यूर भाईयो और बहनो, अल्लाह का ये एहसान हैं की उसने हमे इन्सान बनाया और अक्ली शऊर बख्शा ताकि हम अच्छाई-बुराई, हक-बातिल, नेकी-बदी मे फ़र्क महसूस कर सके| साथ ही अल्लाह ने हमे अपना पसंदीदा दीन, दीने इस्लाम दिया जो किसी खास इन्सान या कौम या मुल्क के लिये नही बल्कि तमाम दुनिया के इन्सानो के लिये हैं| लेकिन आज अल्लाह की बनाई हुई मख्लूक इन्सान ने आपसी तनाज़ो और तफ़र्को के तहत इस दीन के इतने टुकड़े कर डाले के आज ये फ़र्क करना मुश्किल हो जाता हैं के कौन सा गिरोह सही इस्लाम की तालिम पर और कौन गलती पर हैं| अल्लाह ने हमे एक कल्मा, एक कुरान, एक नबी दिया बावजूद इसके आज कल्मा भी एक हैं, दीन भी एक हैं, और नबी भी वही हैं लेकिन मानने वाले अपने तरीके से दीन पर चल रहे हैं| आज दुनिया की इस फ़रेबकार ज़िन्दगी जो के वक्ती हैं उसमे मुसल्मान इतना खोया हैं के न दीन की फ़िक्र ना आखीरत की फ़िक्र लेकिन जब तफ़र्के की बात आती हैं तो जो जिस जमात का हम ख्याल हैं उसकी पैरवी करता हैं न के असल दीन ए इस्लाम की| आज मुसल्मान कुरान तो पढ़ता हैं मगर समझता नही, जबकि खुद कुरान के सीखने वाले के लिये अल्लाह ने क्या कुछ रखा है| फ़र्माने नबवी हैं-
तुम मे बेह्तर शख्स वो हैं जो कुरान सीखे और सिखाये| (बुखारी)

कुरान सीखने के लिये जो शख्स घर से निकले, अल्लाह उसके लिये जन्नत का रास्ता आसान फ़रमा देता हैं
कुरान सीखने वाले के लिये ज़मीन व आसमान की हर चीज़ यहा तक के पानी के अन्दर रहने वाली मछ्लियां भी दुआ करती हैं| (इब्ने माजा)
लेकिन अफ़सोस आज कुरान और नबी के फ़र्मान पर अमल करने वाले पर भी इल्ज़ामात लगाये जाते| आज कुरान और अकीदा तौहीद की दावत देने वालो को बदअकीदा और गुमराह का खिताब मिलता हैं| अकीदा तौहीद जोकि इन्सानो पर अल्लाह का खास इनाम हैं, अल्लाह ने इन्सानो तक अपने अंबिया के ज़रिये पहुंचाया और अंबिया ने इस कल्मे तौहीद को बुलन्द करने के लिये बड़ी मशक्क्ते उठायी, जो शुरुआती दुनिया से आज तक अल्लाह के वाहदहू ला शरीक होने की शहादत हैं जिसे आदम अलै0 से लेकर जनाब मुहम्मद रसूल सं0 तक अल्लाह ने सिर्फ़ एक ही रखा उसके मानने वाले इस कल्मा तौहीद की तालीम को भूल गये और गिरोह दर गिरोह बट गये| आज इस कल्मे तौहीद के अकीदे मे इलाकाई, कौम परस्ती, मुल्क परस्ती, बुतपरस्ती, कब्रपरस्ती, नफ़्स परस्ती, पीर परस्ती, अइम्मा(इमाम) परस्ती की मिलावट हैं| अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-
ये हैं अल्लाह ताला तुम्हारा रब! इसके सिवा कोई इबादत के लायक नही, हर चीज़ का पैदा करने वाला हैं, तो तुम इसकी इबादत करो और वो हर चीज़ का कारसाज़ हैं|(सूरह अल अनाअम सूरह नं0 6 आयत नं0 102)




तुमसे पहले भी जो रसूल हमने भेजा इसकी तरफ़ वह्यी नाज़िल फ़रमाई के मेरे सिवा कोई माबूद बरहक नही पस तुम सब मेरी ही इबादत करो| (सूरह अल अंबिया सूरह नं 21 आयत नं 25)

लेकिन अल्लाह के इस हुक्म के बावजूद आज इस उम्मते मुस्लिमा की जुबान पर कल्मा तौहीद तो हैं मगर अमल मे कही न कही किसी न किसी किस्म का शिर्क भी हैं| अकसर लोगो का ये कहना के जो आयते ऊपर पेश करी गयी हैं वो उस वक्त के मुशरिको के लिये अल्लाह ने नाज़ील करी| तो मैं उन्हे बताना चाहूंगा के अकसर लोग कुरान के हर पहलू पर गौर भी नही करते| कुरान अल्लाह ने हक के साथ कयामत तक के लिये तमाम इन्सानो के लिये राहे हिदायत के लिये उतारी| अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-

ये कुरान लोगो के लिये इत्तेलानामा हैं के इसके ज़रिये वो होशियार कर दिये जाये और बखूबी मालूम करले के अल्लाह एक ही माबूद हैं और ताकि अकलमंद लोग सोच समझ ले| (सूरह इब्राहिम सूरह नं 14 आयत नं 52)

माह रमज़ान वो हैं जिसमे कुरान उतारा गया, जो लोगो को हिदायत करने वाला हैं और जिस मे हिदायत की और हक व बातिल की तमीज़ की निशानिया हैं| (सूरह अल बकरा सूरह नं 2 आयत नं 185)
ऐ लोगो तुम्हारे रब की तरफ़ से एक ऐसी चीज़ आई हैं जो नसीहत हैं और दिलो मे जो रोग हैं इसके लिये शिफ़ा हैं और रहनुमाई करने वाली हैं और रहमत हैं ईमान वालो के लिये| (सूरह युनुस सूरह नं 10 आयत नं 57)
ये किताब हमने आपकी तरफ़ उतारी, के आप लोगो को अन्धेरो से उजाले की तरफ़ लाये इसके रब के हुक्म से, ज़बरदस्त और तारिफ़ो वाले अल्लाह की तरफ़ से| (सूरह इब्राहिम सूरह नं 14 आयत नं 1)
क्या ये कुरान मे गौर फ़िक्र नही करते या इनके दिलो मे ताले पड़े हुये हैं| (सूरह मुहम्मद सूरह नं 47 आयत नं 24)
यकीनन ये कुरान वो रास्ता दिखाता हैं जो सबसे सीधा हैं और मोमिनो को जो नेक अमल करते हैं इस बात की बशारत देता हैं के इनके लिये बहुत बड़ा अज्र हैं| (सूरह बनी ईसराइल सूरह नं 17 आयत नं 9)




ये कुरान हम लोगो के लिये नाज़िल कर रहे हैं मोमिनो के लिये सरासर शिफ़ा और रहमत हैं| हां ज़ालिमो को सिवाये नुकसान के कोई ज़्यादती नही होती| (सूरह बनी ईसराइल सूरह नं 17 आयत नं 82)

अगर ये कुरान जो के अल्लाह के तरफ़ से इत्तेलानामा हैं और लोगो की हिदायत के लिये उतारा गया तो क्या जो नस्ली मुसल्मान हैं वो अल्लाह की हिदायत लेकर पैदा हुये हैं| उन्हे कुरान पर अमल करने कि कोई ज़रूरत नही| नाऊज़ोबिल्लाह! अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-
इनमे से अकसर लोग बावजूद अल्लाह पर ईमान रखने के भी मुश्रिक हैं| (सूरह युसुफ़ सूरह नं 12 आयत नं 106)
लिहाज़ा अकसर इन्सान मुसलमान होने के बावजूद भी अपने लाइल्म, कुरान और हदीस से दूरी के सबब शिर्क मे मुब्तिला हैं और उसे ये भी इल्म नही के बकौल कुरान वो मुश्रिक हैं| सिर्फ़ मुसल्मान के घर मे पैदा होने या नाम मुसल्मान होने से इन्सान मुसल्मान नही होता बल्कि जब तक इन्सान का अकीदा तौहीद कुरान और नबी के फ़रमान के मुताबिक न हो इन्सान मुसल्मान हो ही नही सकता| क्या कुरान की इन आयतो के बाद भी किसी और दलील की ज़रूरत या किसी मे ये कहने की जुर्रत हैं के कुरान के अहकाम जो मुश्रिके मक्का के लिये थे वो आज मुसलमानो पर आयद नही होते बावजूद इसके के वो अगर मुश्रिके मक्का वाले काम करते हो| वक्त कोई सा भी हो लेकिन दस्तूर सिर्फ़ कुरान और नबी के फ़र्मान का होगा| अगर आज मुसल्मान मुश्रिके मकका वाले काम करेगा तो उस पर भी कुरान का वही हुक्म हैं जो मुश्रिके मक्का पर अल्लाह ने लागू किया था| लिहाज़ा इन अटकलो से बचे और खालिस कुरान और हदीस(फ़रमाने नबी) पर अमल करे और शिर्क से बचे| अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-
ऐसी इन्साफ़ वाली बात की तरफ़ आओ जो हम मे बराबर हैं के हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करे न इसके साथ किसी को शरीक बनाये, न अल्लाह को छोड़ कर आपस मे एक दूसरे को अपना रब बनाये| पस अगर वो मुंह फ़ेरे तो आप कह दो के गवाह रहो हम तो मुसल्मान हैं| (सूरह अल इमरान सूरह नं0 3 आयत नं0 64)

लिहाज़ा तमाम इन्सान पर ये बात लाज़िम करार हैं की वो कुरान और हदीस के मुताबिक ही काम करे और इस फ़िर्कापरस्ती के परचम को छोड़ कर खालिस इस्लाम (कुरान और हदीस) पर अमल करे| मत भूले के अल्लाह ने कुरान मे फ़रमाया-
तुममे से एक जमात ऐसी होनी चाहिये जो भलाई की तरफ़ बुलाये और नेक कामो का हुक्म करे और बुरे कामो से रोके, और यही लोग कामयाब होने वाले हैं| (सूरह अल इमरान सूरह नं0 3 आयत नं0 104)
लिहाज़ा कुरान और हदीस को अपनी ज़िन्दगी का आईना बनाईये और लोगो तक दावत ए हक पहुंचाये ताकि इस बिखरी हुई उम्मत मे इत्तेहाद पैदा हो सके और और तमाम आलमे इस्लाम एक प्लेटफ़ार्म पर आ सके| अल्लाह कुरान मे फ़रमाता हैं-
और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लो और फ़ूट मे ना पड़ो| (सूरह अल इमरान सूरह नं0 3 आयत नं0 103)
मत भूले के फ़िर्कापरस्ती करने वालो को अल्लाह पसन्द नही करता और ऐसे लोगो का दीन ए इस्लाम से कोई वास्ता नही क्योकि अल्लाह ही का फ़रमान हैं-




बेशक जिन लोगो ने दीन के टुकड़े –टुकड़े कर दिया और गिरोह गिरोह बन गये आप का इनसे कोई ताल्लुक नही| (सूरह अल अनआम सूरह नं 6 आयत नं 159)

हमारी आपसे अपील हैं के आप कुरान और हदीस की तालिम पर गौर फ़िक्र करे और ज़ाति तौर पर दावती और इस्लाही बात लोगो तक पहुंचाये ताकि लोगो मे इत्तेहाद कायम हो|

admin

The author didn't add any Information to his profile yet.