सलमान की फिल्म ‘स्टेट ऑफ माइंड’ हैं, सोचिए मत, देख लीजिए

सलमान की फिल्म ‘स्टेट ऑफ माइंड’ हैं, सोचिए मत, देख लीजिए

स्टार कास्ट: सलमान खान, अनुष्का शर्मा, अमित साद, रणदीप हुड्डा, कुमुद मिश्रा,

म्यूजिक: विशाल-शेखर
प्रोडक्शन कंपनी: यशराज बैनर
इंटरटेनमेंट…इंटरटेनमेंट…इंटरटेनमेंट। इसी इंटरटेनमेंट के लिए व्यावसायिक फिल्में बनती हैं, पर असली इंटरटेनमेंट तो मानों सलमान खान ही हैं। और इंटरटेनर सलमान खान यानि भाई जान की ईद पर रिलीज हुई फिल्म सुल्तान अपने फैंस के लिए भाईजान की ईदी की तरह ही है।
सलमान खान हमेशा से एक भावुक प्रेमी के रोल में ज्यादा जमे हैं, पर इमोशंस के साथ एक्शन और पारिवारिक मसाला डाल दिया जाए तो वाकई भाईजान की फिल्म को कमाई के चार्ट में पीछे छोड़ना नामुमकिन ही है। ‘हमारे यहां इश्क की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।’ ये डायलॉग जैसे ही आता है, सिनेमाहॉल तालियों से गूंजने लगता है। सुल्तान फिल्म में सलमान यानि सुल्तान अली खान केबल का बिजनेस करता है, जो हर घर पर वीडियोकॉन के डिश लगाता रहता है। वो पतंग लूटने का शौकीन है। पतंग लूटने के मामले में उसका कोई सानी नहीं है। सुल्तान अली खान का एक जिगरी दोस्त है, जो उसके हर सुख-दुख का साथी है। सुल्तान अली खान एक दिन पतंग लूटते हुए आरफा यानि अनुष्का शर्मा से टकरा जाता है और वो सलमान के गाल पर थप्पड़ रसीद देती है।
आरफा एक स्टेट चैंपियन रेसलर है। सुल्तान उसे अगली बार अपने ही दोस्त की शादी में देखता है, जहां उसके लड्डुओं का थाल गिर जाता है। और अपनी दादी के कहे मुताबिक वहीं पर वो आई लव यू बोल देता है। सुल्तान जब टूटी फूटी अंग्रेजी में आरफा से बात करता है, तो आरफा ये कहते हुए झिड़कती है कि अगर अंग्रेजी आती नहीं है, तो बकवास क्यों करता है। और जवाब में सुल्तान कहता है, ‘हमारे यहां अंग्रेजी में लड़कियां जल्दी पटती हैं। आई लव यू के बाद का मामला किस पर पहुंचता है।’ खैर, इसके बाद सुल्तान आरफा को रेसलिंग करते हुए देखता है, जिसमें वे पुरुष रेलसर को घुमाकर पटकती है।




यहां से वो आरफा का दीवाना हो जाता है। वो उसे फिर से प्रपोज करता है, जिसमें वो अपने सपने ओलंपिक गोल्ड के बारे में बताती है। वो बताती है कि उसका शौहर कोई रेसलर ही हो सकता है। और इस लाइन से कुछ समय पहले ही सुल्तान तय कर चुका होता है कि वो रेसलर आरफा के लिए रेसलर ही बन जाएगा। वो फिर से ये बात आरफा को बताता है और उसके पिता का रोल कर रहे कुमुद मिश्रा से ही ट्रेनिंग लेने पहुंच जाता है। उसके पिता समेत तमाम रेसलर उसका मजाक उड़ाते हैं और वो 3 मिनट में किसी को भी छू लेने का चैलेंज देता है।
इन तीन मिनटों में कुमुद मिश्रा के 3 बड़े रेसलर उसे पकड़ नहीं पाते और वो सुल्तान को ट्रेनिंग देने के लिए राजी हो जाता है। सुल्तान फिल्म की कहानी यहीं से थोड़ा जोर पकड़ती है, पर मनोरंजक तरीके से। सुल्तान से आरफा दोस्ती कर लेती है, ये कहकर कि वो अपने सपने के बीच किसी को नहीं आने देगी पर उसे दोस्त बना लेती है। यहीं से दोनों का साथ घूमना फिरना शुरु हो जाता है और 440 बोल्ट गाना आ जाता है। गाने के बाद वो डिनर पर जाते हैं, जहां सुल्तान के दोस्त आरफा को भाभी बोलते हैं, जिसकी वजह से वो नाराज हो जाती है और सुल्तान को थप्पड़ रसीद देती है।
सुल्तान यहां से गुस्से में आता है और स्टेट चैंपियनशिप के लिए उसके पिता ने अपना नाम भेजने को कहना है। खैर, आगे वो स्टेट चैंपियनशिप में जाता है, फिर नेशनल चैंपियन बनने के बाद दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतता है। इस दौरान सुल्तान और आरफा शादी कर लेतें हैं। दोनों का चयन लंदन ओलंपिक के लिए होता है, जिसमें सेलेक्शन की खबर आते ही आरफा की प्रेगनेंसी के बारे में पता चलता है। यहां से फिल्म इमोशनल ट्रैक पकड़ती है। सुल्तान की खुशी और बच्चे के लिए आरफा अपना सपना तोड़ देती है और सुल्तान स्वर्ण पदक जीतकर आता है। जहां से फिल्म की कहानी मोड़ देती है। इस मोड़ पर आकर किसी भी सफल खिलाड़ी का रूतबा हासिल कर चुके खिलाड़ी के गुरूर को दिखाती है। और वो वर्ल्ड चैंपियनशिप में जाता है। आरफा के रोकने के बावजूद।




यहां से लौटने के बाद उसे पता चलता है कि डिलीवरी के दौरान रेयर ब्लडग्रुप होने की वजह से उसका बच्चा नहीं बचता और आरफा उससे अलग हो जाती है। फिर वो सबकुछ छोड़ देता है और अपने बच्चे अमन के नाम ब्लड बैंक खुलवाने की कोशिश करता है। इतनी कहानी तो फ्लैशबैक में चलती है, जो एक फ्रीबॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही टीम का मालिक होता है। वो सुल्तान को प्रोबॉक्सिंग के लिए मनाने आया हुआ होता है, पर सुल्तान के न मानने पर उसके दोस्त के पास जाता है। जो उसे ये कहानी सुनाता है। इसके बाद की कहानी क्या है, वो आप सुल्तान फिल्म को सिनेमाहॉल में जाकर देखें। हां, आखिर में मारधाड़ के सींस बच्चों को तो पसंद आएंगे ही, साथ ही आप भी रोमांचिक हो उठेंगे।
कुल मिलाकर फिल्म का प्लॉट हरियाणा की एक रेसलर पर है, जिसका दीवाना भी रेसलर बन जाता है। वो हरियाणा का शेर बनता है, फिर देश के लिए ओलंपिक मेडल जीतता है। इसमें एक छोटे मगर महत्वपूर्ण किरदार में हैं रणदीप हुड्डा, जो इंग्लैंड में स्ट्रीट फाइटिंग का चैंपियन रह चुका है। हरियाणवी अंदाज में फिर से खूब जमें हैं, पर उन्हें और स्पेश देना था। इस फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो ‘जग घूमेया, बेबी को बेस पसंद है, 440 बोल्ट’ सभी गानों का फिल्मांकन जोरदार है। हाल, हॉल के बाहर अगर आपको कोई गाना याद रहेगा, तो वो दिल को छू लेने वाला गाना ‘जग घूमेया, थारे जैसा न कोए’ ही है।




राहत फतेह अली खान की आवाज में ये गाना लंबे समय तक दर्शकों को याद रहेगा। विशाल शेखर का म्यूजिक अच्छा है। बैकग्रॉउंड म्यूजिक में और मेहनत की जा सकती थी। इसमें ब्रदर्स एंथम जैसा टच देने की कोशिश की गई है, जिसमें जोश, जुनून और ईश्वर को याद किया जा रहा है।
खैर, कोरियोग्राफी शानदार है। आर्तर जुरावस्की ने अपना काम शानदार तरीके से किया है। आर्तर जुरावस्की पोलैंड के हैं, पर बॉलीवुड में जैकपॉट, मर्दानी जैसी फिल्मों में कोरियोग्राफी कर चुके हैं। फिल्म का स्क्रीनप्ले आदित्य चोपड़ा ने लिखा है, जो अच्छा है। फिल्म का डायरेक्शन अली अब्बास जफर ने किया है, जो न्यूयॉर्क, मेरे ब्रदर की दुल्हन जैसी फिल्में बना चुके हैं। आखिर में सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि सलमान की फिल्में ‘स्टेट ऑफ माइंड’ हैं। सोचिए मत, देख लीजिए। लंबे समय बाद ऐसी फिल्म आई है, जिसे परिवार के साथ देख सकते हैं।

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