ये ज़माना अदब से झुकायेगा सर, तुम मुसलमान बन कर जियो तो सही

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कहीं खोया ख़ुदा हमने, कहीं दुनिया गँवाई है
बड़े शहरों में रहने की बड़ी क़ीमत चुकाई है
कभी तो नूर फैलेगा तेरे काग़ज़ से दुनिया में
लिखे जा जब तलक तेरे क़लम में रोशनाई है

मेरे प्यारे शायर, मेरे हर दिल अज़ीज़ शायर, वो शायर जो शायर कम एक आफ़ाक़ी शख्सियत ज़्यादा है, जिसको देख गुमाँ होता है कि अल्लाह जब दिलों मैं अपनी मोहबत डाल देता है तो कैसे बंदों से मुहब्बत करना सिखा देता है, जाने क्या अदा उनकी अल्लाह को पसंद आ गई की दुसरो के दर्द उनके झोली मैं डाल दिये, एक हस्सास दिल उनको दे दिया, वो दिल जिस मैं ग़म है, जिस मैं हौसले हैं, कुछ कर गुजरने की चाहत है, जिस मैं वक्त को बदलने की लगन है, लोगो के आंसू पोछने की उन्हें राहत पहुंचाने की क़ुव्वत है, और ये सब छोटे छोटे अंशो से मिल कर जो शख्सियत वजूद मैं आयी उसी का नाम इमरान प्रतापगढ़ी है।

हक़ की पहचान बन कर जियो तो सही,
तुम निगहबान बन कर जियो तो सही !
ये ज़माना अदब से झुकायेगा सर,
तुम मुसलमान बन कर जियो तो सही !

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उनकी नज़में सिर्फ सियासी शायरी नही है, वो बदलाव की शायरी है, वो हौसलो की शायरी है, वो मज़्लूमो की आवाज़ है, वो वक़्त की ज़रूरत है, वो जब इस्लाम की बात करते है तो प्यारे मुस्तफा मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पैग़ाम को आम करते हैं, की सबसे मुहब्बत से पेश आइए, वो नरमी की बात करते है, वो आला किरदार ऊंचे अख़लाक़ की बात करते हैं, उनके मिसरे इस्लाम की तस्वीर को साफ शफ़्फ़ाफ़ तरीके से पेश करते हैं।

इस तरह हौसले आज़माया करो
मुश्किलें देख कर मुस्कुराया करो
दो निवाले भले कम ही खाया करो
अपने बच्चों को लेकिन पढ़ाया करो

उनकी शायरी इस्लाम के ‘इक़रा’ के मैसेज को घर घर पहुंचाती है, आज इमरान प्रतापगढ़ी का मक़्सद सिर्फ मुशायरा नही है, उनका मक़सद तालीम को हर घर हर दरवाज़े तक पहुंचाना है, वो एक जुनून आंखों मैं लिए घूमते हैं, की क़ौम का हर बच्चा आला तालीम याफ्ता हो, वो ब्यूरोक्रेसी का हिस्सा बने, मुल्क के आला मंसब पर बैठ कर मुल्क की तरक़्की और खुशहाली मैं साझेदार बने।

इमरान प्रतापगढ़ी जहां एक समाज सुधारक के रूप मे उभरे हैं वहीं वो लोगो के ज़ख्मो पर मरहम रखने वाले एक ऐसे डॉक्टर एक हकीम, एक हमदर्द की शक्ल में अवाम के ज़हनों दिल मैं बस गए हैं, अपने काधों पर एक ऐसी ज़िम्मेदारी लिए ये दीवानों की तरह दिन और रात भटक रहे हैं, लेकिन उनकी अनथक मेहनत बेकार नही जाएगी, कई चराग़ उनके ज़रिए जलाई गई शमा से रोशन हो रहे हैं, ढेर सारे नए दौर के बच्चे उनके तर्ज़े क़दम पर चलने की कोशिश मैं हैं, और कोशिशें अक्सर कामयाब हो जाती हैं।

उनके तेवर उनका लहजा उनकी आवाज़ उनके अंदाज़ सब मैं सच्चाई झलकती है, और उनकी इसी सच्चाई से मुझे आपको और हम सबको बेलौस मुहब्बत है।

और आखिर मैं एक शायर की चंद लाइन्स इमरान साहब के इरादों का जैसे एक खाका से पेश करती हैं, उनकी इंक़लाबी शख्सियत से बड़ी उम्मीदें ज़िंदा हैं, की जाने कामयाबी के कौन से नए नए बाब ये शख्स लिखेगा, और वो इरादे वो वादे जो उन्होंने खुद से किये हैं एक दिन ज़रूर रंग लाएंगे।

जुनूँ है ज़हन में तो हौसले तलाश करो
मिसाले-आबे-रवाँ रास्ते तलाश करो

ये इज़्तराब रगों में बहुत ज़रूरी है
उठो सफ़र के नए सिलसिले तलाश करो



https://www.youtube.com/watch?v=1L4AyF9-uOU

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