तीन तलाक महिलाओं को दफन करने जैसा- आरिफ मोहम्मद खान

तीन तलाक महिलाओं को दफन करने जैसा- आरिफ मोहम्मद खान





ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से पेश आरिफ मोहम्मद खान ने दलील दी कि

तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा नही है..तीन तलाक की प्रक्रिया महिलाओं को जिंदा दफ़न करने के

समान है…पैगंबर ने कहा है कि समाधान के लिए कुरान देखना होगा..कानून का सामाजिक सरोकार होता

है…कुरान मे तलाक के पूरी प्रक्रिया बताई गई है, इसके तहत चार स्टेप होते है..एक साथ तीन तलाक

का कोई जिक्र नहीं है..पहले बातचीत की बात है, इसके बाद तमाम उदाहरण देकर तलाक के नतीजें के

बारे मे बताया जाता है..बत्तों पर क्या असर होगा, यह बताया जाता है,,और बाद में समझौते की कोशिश

फेल होने के बाद तलाक प्रावधान है,,तीन तलाक का एक बार में कोई प्रावधान नहीं है..इसके अलावा

तलाक में इद्दत पीरियड का भी जिक्र है इस दौरान महिला को घर से नहीं निकाला जा सकता..तीन

महीने बाद बाद दोने अलग होते है..तलाक होने के बाद दो बार शादी का मौका मिलता है..दो बार के बाद




हलाला का प्रावधान है….

सुप्रीम कोर्ट- क्या इस्लाम के मूल पार्ट में तीन तलाक है?

आरिफ मोहम्मद खान- इस्लाम के मूल पार्ट में तीन तलाक का कोई प्रावधान नही है…यह इस्लाम की

पवित्रता के बिल्कुल दूर है..यह इस्लाम धर्म की तमाम अच्छाइयों का उल्लंघन करता है.. प्री-इस्लामिक

काल मे नवजात बच्चियों को दफन  किया जाता था, लेकिन मौजूदा दौर में ट्रिपल तलाक महिलाओं को

दफन करने जैसा है….

Nadeem Akhtar

The author didn't add any Information to his profile yet.