हम कुरान के नियम मानते हैं, सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता निर्देश: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड-P2N

हम कुरान के नियम मानते हैं, सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता निर्देश: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड-P2N

देश की सर्वोच्च अदालत के निर्देश को मानने से इनकार करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए में तीन बार तलाक कहकर रिश्ते खत्म करने की प्रथा की कानूनी वैधता जांच करने का निर्देश दिया था।

ई भारत की रिपोर्ट के अनुसार इस मसले पर लॉ बोर्ड ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि समुदाय के  पर्सनल लॉ कुरान पर आधारित हैं, ऐसे में यह सर्वोच्च अदालत के क्षेत्राधिकार में नहीं है कि वह उसकी समीक्षा करे। एआईएमपीएलबी ने कहा कि यह कोई संसद से पास किया हुआ कानून नहीं है। अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की खबर के मुताबिक, बोर्ड ने एक यूनिफॉर्म सिविल कोड की उपयोगिता को भी चुनौती देते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय अखंडता और एकता की कोई गारंटी नहीं है। इनका तर्क है कि एक साझी आस्था ईसाई देशों को दो विश्व युद्धों से अलग रखने में नाकाम रही। एआईएमपीएलबी ने कहा कि इसी तरह हिन्दू कोड बिल जातीय भेदभाव को नहीं मिटा सका।
कानून और धर्म से निर्देशित मानदंडों के बीच हो स्पष्टता
ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने वकील एजाज मकबूल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि विधायिका द्वारा पारित कानून और धर्म से निर्देशित सामाजिक मानदंडों के बीच एक स्पष्ट लकीर होनी चाहिए। एजाज ने कहा, ‘मोहम्मडन लॉ की स्थापना पवित्र कुरान और इस्लाम के पैगंबर की हदीस से की गई है और इसे संविधान के आर्टिकल 13 के मुताबिक अभिव्यक्ति के दायरे में लाकर लागू नहीं किया जा सकता। मुसलमानों के पर्सनल लॉ विधायिका द्वारा पास नहीं किए गए हैं।’

Khushboo Akhtar

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