मसीरूद्दीन और मिन्हाज पर क्यों खामोश है मुस्लिम तंजीमें ?

खूंखार आतंकवादी, कोई मास्टरमाइंड टाइप जो न जाने कहां कहां से ट्रेनिग लिए हुए है लेकिन जब दिल्ली के ISBT बस अड्डे पर उतरता है तो सबसे पहले उर्दू का अखबार खरीदता है. गूगल मैप और एंड्राइड फोन के ज़माने में वो कागज़ पर एक नक्शा ज़रूर रखता है ताकि पकड़ा जाए तो पुलिस को आसानी हो.

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14 जुलाई 2021 @ 08:07
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पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन्हीं रद्दी के ढेर में पड़ीं कहानियों का खामियाजा गुलबर्गा के निसार अहमद से लेकर श्रीनगर के बशीर भट्ट जैसे सैंकड़ों मुस्लिम नौजवानों ने दस बीस पच्चीस वर्ष तक कैदखाने में कैद रहे हैं।

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