दिल्‍ली सरकार ने पटाखों पर लगाया बैन, व्‍यापारी नाराज

Delhi government द्वारा crackers की बिक्री पर ban लगाने से पटाखा व्‍यपारियों में नाराजगी है. उनका कहना है कि पटाखों के लिए दिसंबर-जनवरी में ही एडवांस पेमेंट हो जाता है. ऐसे बैन लगाने से उनका नुकसान होगा. अगर बंद करना है तो पटाखों का प्रोडक्‍शन बंद करना चाहिए.

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16 सितम्बर 2021 @ 13:07
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aap cm kejriwal

नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में प्रदूषण (pollution) को देखते हुए दिल्‍ली सरकार (Delhi government) ने इस वर्ष भी दिवाली पर पटाखों (crackers) की बिक्री, इस्‍तेमाल और स्‍टोर करने पर रोक लगा दी है. सरकार का कहना है कि यह फैसला लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए लिया गया है. वहीं दूसरी और पटाखा व्‍यापारियों में गुस्‍सा है. उनका कहना है कि इसके लिए एडवांस पहले दिसंबर जनवरी में दे देते हैं और त्‍यौहार में कमाई कर पूरे साल घर का खर्च चलाते हैं. अगर बंद करना है तो पटाखों का प्रोडक्‍शन बंद करना चाहिए. हालांकि आसपास के राज्‍यों से जलने वाली पराली से भी दिल्‍ली में प्रदूषण का स्‍तर बढ़ जाता है.

 

दिल्‍ली-एनसीआर में पटाखों की सबसे बड़ी मार्केट सदर बाजार है. यहीं से आसपास के सभी शहरों में पटाखे जाते थे. दिल्‍ली में लगातार एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स खराब होने की वजह से केजरीवाल सरकार ने 2016 से पटाखों की बिक्री, उपयोग और स्‍टोर पर प्रतिबंध लगा रखा है. इस वर्ष भी दिल्‍ली सरकार ने पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. सदर बाजार में पटाखों के व्‍यापारियों में खासी नाराजगी है.  इस संबंध में सदर बाजार फायर वर्क्‍स ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष नरेन्‍द्र गुप्‍ता बताते हैं कि पटाखों का काम व्‍यापारी दो तरह से करते हैं, एक स्‍थाई लाइसेंस से और दूसरा अस्‍थाई लाइसेंस से होता है.

वे बताते हैं कि अस्‍थाई लाइसेंस वाले हैंड टू माउथ होते हैं, दिवाली के दौरान होने वाली कमाई से व्‍यापारी का पूरे साल का गुजारा होता है. एक अस्‍थाई लाइसेंस से 20 से 25 परिवार को गुजारा होता है. पहले केवल सदर बाजार में 175 अस्‍थाई लाइसेंस लिए जाते थे, लेकिन अब संख्‍या 17 के करीब बची है. वर्ष 2019 में करीब 15 करोड़ का कारोबार हुआ था, लेकिन 2020 में केवल चार दिन के लिए लाइसेंस दिए गए, जिससे व्‍यापारियों का काफी नुकसान हुआ है. वे बताते हैं कि प्रदूषण को देखते हुए ग्रीन पटाखों का प्रोडक्‍शन और बिक्री शुरू कर दी गई थी, लेकिन सरकार ने अब वो भी बंद करा दिया है.

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