50 हजार करोड़ के निवेश से 500 ‘गतिशक्ति इंटीग्रेटेड टर्मिनल’ बनाएगी रेलवे

नयी दिल्ली: देश के ढांचागत विकास के लिए महत्वाकांक्षी ‘गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के अंतर्गत भारतीय रेलवे करीब 50 हजार करोड़ रुपए के निवेश से 500 गतिशक्ति इंटीग्रेटेड टर्मिनल विकसित करेगी जिनमें हवाईअड्डे, राजमार्ग, बंदरगाह और नदी जलमार्ग जुड़े होंगे।

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15 अक्टूबर 2021 @ 00:21
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रेल, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी लाने के लिए इन सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने की सोच रखते हैं और इसीलिए गतिशक्ति मिशन की कल्पना की है। उन्होंने कहा कि देश में लॉजिस्टिक्स की लागत सकल घरेलू उत्पाद की 13 प्रतिशत है और इसे कम करना है।
श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे ने देश में कार्गे के परिवहन को आरंभिक बिन्दु से लेकर अंतिम गंतव्य तक आसानी से पहुंचाने के उद्देश्य से मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल बनाने की योजना बनायी है जाे रेलवे के साथ नदी जलमार्ग, बंदरगाह, हवाईअड्डे से जुड़े होंगे और उनका प्रबंधन इस प्रकार से किया जाएगा जिससे माल एक माध्यम से दूसरे एवं तीसरे माध्यमों के बीच आसानी से हस्तांतरित हो तथा शीघ्रतम अंतिम गंतव्य तक पहुंच सके। इन्हें गतिशक्ति इंटीग्रेटेड टर्मिनल कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन साल के भीतर कम से कम 200 ऐसे टर्मिनल बन कर तैयार हो जाएंगे।
             एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि ये गतिशक्ति इंटीग्रेटेड टर्मिनल बल्क कमोडिटी जैसे कोयला, स्टील, सीमेंट, बॉक्साइट आदि के अलावा पार्सल के लिए भी टर्मिनल बनाये जाएंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नयी दिल्ली स्टेशन जैसे सभी महानगरीय स्टेशनों के पुनर्विकास में पार्सल टर्मिनल भी बनाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के लिए रेलवे को सालाना माल ढुलाई 200 करोड़ टन से अधिक के स्तर पर ले जानी होगी।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि रेलवे के मालवहन गलियारे के अलावा हाईस्पीड रेल परियोजनाओं को भी गतिशक्ति टर्मिनल से जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को राजधानी में गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरूआत की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गतिशक्ति के इस महाअभियान के केंद्र में भारत के लोग, भारत का उद्योग एवं व्यापार जगत, विनिर्माता और देश के किसान हैं। यह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को 21वीं सदी के भारत के निर्माण के लिए नई ऊर्जा देगा और उनके रास्ते के अवरोध समाप्त करेगा।

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