जामा मस्जिद के सामने शांतिपूर्वक प्रदर्शन से पुलिस को क्या दिक्कत थी? तीस हजारी कोर्ट का प्रश्न

चंद्रशेखर आजाद की जमानत याचिका पर सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित, कोर्ट ने भीम आर्मी चीफ को उभरता हुआ नेता बताया

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पल पल न्यूज़ वेब डेस्क
14 जनवरी 2020 @ 15:21

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून पर दिल्ली के दरियागंज में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन में क्या दिक्कत थी?  कोर्ट ने कहा कि जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं. तीस हजारी कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि जामा मस्जिद के सामने शांतिपूर्वक प्रदर्शन होने देने में उन्हें दिक्कत क्या थी. कोर्ट ने आगे भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर को उभरता नेता भी कहा.

दरअसल, जामा मस्जिद पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन के चलते चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें वहां प्रदर्शन की इजाजत नहीं थी.इस प्रदर्शन के बीच दरियागंज में हिंसा भी हुई थी.

कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि कौन से कानून में लिखा है कि धार्मिक स्थान के बाहर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता? आगे कहा गया कि लोग शांति से कहीं भी प्रदर्शन कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा, 'लोग शांति से कहीं भी प्रदर्शन कर सकते हैं. जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं है जो वहां प्रदर्शन नहीं करने दिया जाए. शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन तो पाकिस्तान में भी होने दिया जाता है.'

सुनवाई के दौरान चंद्रशेखर पर कोर्ट ने कहा कि वह उभरते नेता हैं. उनके प्रदर्शन करने में क्या परेशानी थी. जज ने आगे कहा, 'मैंने कई ऐसे लोग और कई मौके देखें हैं जब संसद के बाहर भी प्रदर्शन हुए हैं.' इसके साथ ही कोर्ट ने चंद्रशेखर की जमानत याचिका पर सुनवाई को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया.

आप को बता दें कि पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा मामले में गिरफ्तार भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने सोमवार को जमानत के लिए दिल्ली की अदालत में याचिका में दायर दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके खिलाफ अस्पष्ट आरोप लगाया है और गिरफ्तारी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया.मंगलवार को कोर्ट ने आजाद की याचिका पर सुनवाई की.

आजाद ने दावा किया कि प्राथमिकी में उनके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं जो न केवल आधारहीनहैं, बल्कि अजीबभी हैं. आजाद की जमानत याचिका वकील महमूद प्राचा के जरिए दाखिल की गई. इसमें कहा गया है कि प्राथमिकी में आजाद की विशेष भूमिका की जानकारी नहीं है और उसकी सामग्री अनिश्चितऔर अटकलोंएवं संदेहपर आधारित है, जबकि वह शांति कायम रखने की कोशिश कर रहे थे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आजाद के संगठन ने 20 दिसंबर को पुलिस की अनुमति के बिना सीएए के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था. इस मामले में गिरफ्तार अन्य 15 लोगों को अदालत ने नौ जनवरी को जमानत दे दी थी. भीम आर्मी प्रमुख ने अपनी याचिका में कहा कि वह मामले की जांच में पूरा सहयोग करने को इच्छुक हैं और वह किसी सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करेंगे. पब्लिक प्रोसिक्यूटर की तरफ से चंद्रशेखर आजाद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि गया कि उसने सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए हिंसा भड़काई थी, लेकिन तीस हजारी सेशन कोर्ट की जज कामिनी लौ ने कहा कि इसमें उसके खिलाफ कोई हिंसा की बात नहीं है. कामिनी लौ ने सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शन और धरना गलत है. इसके साथ ही, उन्होंने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को यह याद दिलाया कि प्रदर्शन एक संवैधानिक अधिकार है.

 उन्होंने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से यह भी पूछा कि उन्होंने संविधान को पढ़ा होगा. लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक, जज ने पब्लिक प्रसिक्यूटर से कहा- आप ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में है. अगर यह पाकिस्तान में होता तो आप वहां जाकर प्रदर्शन कर सकते थे. पाकिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा था.

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