...तो क्या अब शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग करेगी?

यह सवाल इस कारण खड़ा हुआ क्यूंकि नोएडा-दिल्ली के बाची बंद रास्ता को खुलवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वो जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई करे

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पल पल न्यूज़ वेब डेस्क
14 जनवरी 2020 @ 15:31

नई दिल्ली: नोएडा-दिल्ली के बीच कालिंदी कुंज का बंद रास्ता खुलवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वो जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई करे. नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ शाहीन बाग़ में महिलाएं पिछले 15 दिसंबर से धरने पर बैठी हैं. इस कारण नोएडा और दिल्ली का रास्ता बंद है. रास्ता बंद होने के कारण आम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है. स्कूल जाने वाले बच्चों को भी दिक़्क़त हो रही है.लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें रास्ता खुलवाने की अपील की गई थी.मंगलवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई तो की लेकिन कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया. कोर्ट ने कहा कि पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन उसे जनहित और क़ानून-व्यवस्था का ध्यान रखना होगा. मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह बड़ी पिक्चर देखे और आम लोगों के हित में काम करें. हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में शाहीन बाग पर जारी धरने को खत्म करने की बात साफ तौर पर नहीं की है.अदालत में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो दिल्ली सरकार की ओर से पक्ष रखा गया कि वह इस मामले में पक्षकार नहीं है और दिल्ली की कानून व्यवस्था उनके हाथ में नहीं हैं. हालांकि, हाईकोर्ट केंद्र-पुलिस को इसमें एक्शन लेने को कह दिया है.

अदालत की ओर से ना तो प्रदर्शन खत्म करने का आदेश दिया गया है और ना ही सड़क को तुरंत खोलने का आदेश दिया गया है.नोएडा से दिल्ली आने-जाने वाले इस रास्ते से रोजाना करीब ढाई लाख वाहन निकलते हैं, जिन्हें पिछले एक महीने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. अब अदालत ने जब कानून व्यवस्था लागू करने के लिए गेंद दिल्ली पुलिस-केंद्र सरकार के पाले में गेंद डाली है तो प्रशासन के बाद कुछ ही विकल्प बचते हैं.

एक विकल्प यहाँ है किशाहीन बाग में जारी प्रदर्शन को किसी और स्थान पर शिफ्ट कराया जाए. दूसरा विकल्प यह है कि   पुलिस कार्रवाई के द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाया जाए.तीसरा रास्ता यह है कि सरकार का कोई प्रतिनिधि जाकर प्रदर्शनकारियों से चर्चा करे, ताकि खुद ही प्रदर्शनकारी हट जाएं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार के द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ शाहीन बाग पर 15 दिसंबर से प्रदर्शन हो रहा है. यहां पर हजारों की संख्या में महिलाएं, स्टूडेंट और अन्य प्रदर्शनकारी लगातार डटे हुए हैं. यहां बीते दिनों से कुछ नेता भी लगातार प्रदर्शनकारियों के पास जाकर वहां पर संबोधन कर रहे थे.

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