मुजफ्फरपुर: डॉक्टर की लापरवाही के कारण 27 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई  

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले ज्यादातर मरीजों के कॉर्निया खराब हो गए, अब तक सात मरीजों की तो आंख निकालनी पड़ी है

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1 दिसंबर 2021 @ 15:20
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पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर में डॉक्टर की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है।  इस वजह से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले 27 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई।  मुज्फ्फरपुर के आई हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने लापरवाही करते हुए मानक से ज्यादा ऑपरेशन किए। ऑपरेशन कराने वाले ज्यादातर मरीजों के कॉर्निया खराब हो गए हैं। अब तक सात मरीजों की तो आंख निकालनी पड़ी है। 
जूरन छपरा स्थित मुजफ्फरपुर आई हास्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद कई मरीज संक्रमण की चपेट में आ गए। उसके बाद मरीजों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। अस्पताल परिसर में ही मरीज दर्द से कराहते रहे लेकिन उन्हें देखने वाला भी कोई नहीं था।  जब आई हॉस्पिटल में मानक से ज्यादा ऑपरेशन करने का मामला सामने आया तब, मंगलवार को 5 सदस्यीय टीम जांच करने वहां पहुंची।  इसमें सदर अस्पताल से 3 सदस्य और एसकेएमसीएच से 2 सदस्य शामिल थे। एसीएमओ डॉ एस पी सिंह टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।  आई हॉस्पिटल में जांच टीम के पहुंचते ही हड़कंप मच गया।  टीम ने अस्पताल में जांच की। इसके बाद कई मरीजों से बात की कि किस तरह उनका ऑपरेशन किया गया, फिर दिक्कत कैसे हुई? आंख को आखिर क्यों निकलना पड़ा? इसको लेकर कई मरीजों से बातचीत भी की गई। टीम ने ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से भी पूछताछ की है। 
दिलचस्प यह भी है कि शुरुआत में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर ने ऑपरेशन की बात से इनकार किया, बाद में उन्होंने उसे कबूल कर लिया। मरीजों के नाम पते का भी सत्यापन किया गया।  मौके पर पहुंचे आधा दर्जन से अधिक मरीजों को देखा गया इसके बाद उन्हें एसकेएमसीएच भेज दिया गया। आधा दर्जन मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है। डीएम ने आई हॉस्पिटल में अगले आदेश तक ऑपरेशन कराने पर रोक लगा दी है। 
खबर यह भी है कि मामला दबाने के प्रयास में अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन तक को नहीं दी थी। मंगलवार को जांच टीम की सख्ती के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पहले ही चार लोगों की आंख निकालने की बात स्वीकारी। जांच टीम ने आशंका जताई है कि दर्जनभर से अधिक मरीजों की आंख निकालनी पड़ सकती है। ऑपरेशन कराने वाले ज्यादातर मरीजों का कॉर्निया बेकार हो गया है। कई मरीजों में संक्रमण ब्रेन तक पहुंचने का खतरा है। छह पीड़ितों की हालत गंभीर है। इन सबकी आंख बुधवार को एसकेएमसीएच में निकाली जाएगी।उधर, डीएम प्रणव कुमार ने अगले आदेश तक मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में ऑपरेशन पर रोक लगा दी है।
इस बीच दैनिक हिंदुस्तान ने खबर दी है कि डीएम के आदेश पर एसीएमओ डॉ.  सुभाष प्रसाद सिंह के नेतृत्व में बनी जांच टीम लगभग 11 बजे आई हॉस्पिटल पहुंची। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों के साथ ही ऑपरेशन करने वाले डॉ. एनडी साहू को भी बुलाया गया था। गौरतलब है कि सोमवार को डॉ. साहू ने इस बात से इनकार कर दिया था कि उन्होंने ऑपरेशन किया है। मंगलवार को जांच टीम के सामने उन्होंने ऑपरेशन करने की बात कबूली। खबरों में यह भी बताया गया है कि ऑपरेशन के बाद चार लोगों की आंख निकाले जाने की बात अस्पताल प्रशासन ने छिपा रखी थी। इसकी जानकारी डीएम और सिविल सर्जन तक को नहीं दी गई। मंगलवार को जांच टीम के सामने इसका खुलासा हुआ। टीम ने ऑपरेशन के प्रोटोकॉल पर कई सवाल किए। किसी का भी अस्पताल प्रबंधन संतोषप्रद जवाब नहीं दे सका। प्रोटोकॉल के अनुसार एक दिन में एक डॉक्टर को केवल बारह ऑपरेशन करने हैं। प्रबंधन से पूछा गया है कि किस परिस्थिति में एक डॉक्टर ने 65 लोगों का ऑपरेशन किया। इसके साथ ही ओटी की स्थिति और भीड़ की तुलना में अन्य संसाधन की जांच की।
डीएम प्रणव कुमार ने कहा, 'मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में ऑपरेशन पर रोक लगा दी गई है। जांच टीम तकनीकी गड़बड़ी, अस्पताल में मौजूद संसाधनों समेत कई बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।'

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