लखनऊ में मुनव्वर राना की बेटी सुमैय्या राना एवं फौजिया राना सहित 24 प्रदर्शनकारियों पर केस

एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों का कम्बल ले कर भागने वाली पुलिस ने अब प्रदर्शन कर रही महिलाओं को मुकादमों में उलझाना शुरू कर दिया है, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली महिलाएं डर से भाग जाये

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पल पल न्यूज़ वेब डेस्क
21 जनवरी 2020 @ 01:28
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नई दिल्ली: लखनऊ के घंटाघर पर हो रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए योगी सरकार पूरी तरह सक्रीय हो गई है एवं एक दिन पहले प्रदर्शनकारियों का कम्बल ले कर भागने वाली पुलिस ने अब प्रदर्शन कर रही महिलाओं को मुकादमों में उलझाना शुरू कर दिया है, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली महिलाएं डर से भाग जाये. अब यह खबर आ रही है कि लखनऊ नगर में धारा 144 लागू होने के बाद भी नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में घंटाघर में हो रहे प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने तीन मुकदमे दर्ज किए हैं. तीनों एफआईआर ठाकुरगंज थाने में दर्ज हुई हैं जिनमें 24 लोग नामजद व 140 अज्ञात हैं. एडीसीपी पश्चिमी विकास चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि धारा 144 के चलते प्रदर्शन पूरी तरह असंवैधानिक है. पहली एफआईआर- ठाकुरगंज थाने में तैनात दारोगा सेठ पाल सिंह ने मोईनउद्दीन, रसूक अहमद, शबी फातिमा, साफिया, हफीजा, राफिया, नाजनीन, इरफाना, रजिया, रेहाना, नूरबानो, कौसर, फिरदौस, अफरोज, पूजा, फरीन बानो, सुमय्या राना, कहकशा और 125 अज्ञात महिलाओं के आईपीसी की धारा 147, 145, 188 और 283 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है. इस एफआईआर में 20 वाहनों का भी जिक्र किया गया है, जिनकी वजह से घंटाघर के आसपास जाम भी लगा. दूसरी एफआईआर- ठाकुरगंज थाने में तैनात दारोगा कैलाश नारायन त्रिवेदी ने लईस हसन और नसरीन जावेद के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 505 1 बी के तहत दर्ज करवाई है.  तीसरी एफआईआर- ठाकुरगंज थाने में तैनात महिला सिपाही ज्योति कुमारी ने शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैय्या राना, फौजिया राना, रूखसाना, शबी फातिमा और 10 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 145, 188 और 352 के तहत ठाकुरगंज थाने में दर्ज करवाई है.

आप को याद दिला दें कि लखनऊ के घंटाघर में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही महिलाओं से पिछले दिनों पुलिस द्वारा कंबल और खाने-पीने के सामान छीन लेने का मामला भी सामने आया था  जिस पर पुलिस ने यह स्पष्टीकरण दिया कि उसने यह काम विधिक तरीक़े से किया. ये सामान रात में ठंड से बचने के लिए वहां मौजूद महिलाओं में वितरित करने के लिए लाए गए थे.

सवाल यह उठाया गया कि ठंड के मौसम में किसी से कंबल जैसे सामान छीन लेना या फिर उन्हें बांटने से रोकना किस तरीक़े से विधिक हो सकता है किन्तु ऐसे सवाल पुलिस के लिए कोई मायने नहीं रखते. हालांकि लखनऊ पुलिस ने इस बारे में रविवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि ये सामान कुछ बाहरी लोग वितरित कर रहे थे और सामान पाने वाले वो लोग थे जिनका धरना-प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन वहां से मिले वीडियो फ़ुटेज इससे कुछ अलग कहानी कहते हैं. साथ ही वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, खुले आसमान के नीचे भीषण ठंड में प्रदर्शनकारी बैठे थे जिनके लिए वहां मौजूद कुछ लोगों ने खाने-पीने का सामान और कंबल लाकर बांटने का ज़िम्मा उठाया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस ने अचानक कंबल के पैकेट्स और दूसरी चीजों को वहां से हटाना शुरू कर दिया. बाद में सोशल मीडिया पर लखनऊ पुलिस की इस कार्यशैली की काफ़ी आलोचना हुई तो पुलिस ने इस बारे में वक्तव्य जारी कर कहा कि सारी कार्रवाई विधिक तरीक़े से हुई.

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