श्रीरंगापटना की मस्जिद को ढहाए जाने की बात करने वाला साधू अरेस्ट 

गिरफ्तार किये गये साधु का नाम ऋषि कुमार स्वामी बताया जा रहा है

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19 जनवरी 2022 @ 23:53
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बंगलूरू: कर्नाटक पुलिस ने एक तथाकथित साधु को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उस ने श्रीरंगापटना में स्थित जामिया मस्जिद को ढहाए जाने की बात कही। बता दें कि श्रीरंगापटना मांड्या जिले में स्थित है। बताया जा रहा है कि साधु ने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में उस ने दावा करते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक मस्जिद पहले एक हनुमान मंदिर था और इसे बाबरी मस्जिद की तरह गिरा दिया जाना चाहिए।गिरफ्तार किये गये साधु का नाम ऋषि कुमार स्वामी बताया जा रहा है। संत ऋषि कुमार स्वामी हसन में स्थित कालिका मठ से जुड़ा है। ऋषि कुमार स्वामी को चिकमंगलुरू जिले से गिरफ्तार किया गया है। उसके खिलाफ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के एक सुरक्षा गार्ड यथीराज ने शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस के मुताबिक ऋषि कुमार स्वामी शनिवार को श्रीरंगापटना में मौजूद था। वहां यहां एक बाल कलाकार के अंतिम संस्कार में आया था। इस बाल कलाकार की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
इस वीडियो में ऋषि कुमार स्वामी दावा कर रहा  है कि मस्जिद की बाहरी दीवारों के पास बनी मीनारें एक मंदिर से ताल्लुक रखते हैं। श्रीरंगापटना में एक मंदिर को मस्जिद में तब्दील कर दिया गया। अब हिंदुओं को जागना चाहिए। यह एक ऐसी  मस्जिद है जिसे जल्द ही गिरा दिया जाना चाहिए उसी तरह जिस तरह अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई।
दो मीनारों वाला जामा मस्जिद या मस्जिद-ए-अला के बारे में बताया जाता है कि इसका निर्माण साल 1974  में टीपू सुल्तान ने किया था। मौजूद समय में इस मस्जिद की देखरेख भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग के पास है। इस मस्जिद में मदरसा भी है। गिरफ्तारी के बाद साधु ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो अपने बयान पर कायम हैं कि यह ढांचा एक मस्जिद का नहीं बल्कि मंदिर का है। उसने कहा कि परिसर के अंदर स्थित मीनार, दीवारें और कल्याणी (वॉटर बॉडी) हिंदू आर्किटेक्चर के बारे में स्पष्ट तौर से बताते हैं।
ऋषि कुमार अपने बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रहा है। उसने एक फिल्म में भी काम किया है और टीवी रियालिटी शो में भी नजर आ चुका है। ऋषि कुमार की जमानत पर सुनवाई के दौरान उसके वकील ने कहा कि संत ने कोई विवाद बयान नहीं दिया है बल्कि वो मस्जिद के अंदर मंदिर को लेकर अपनी पीड़ा बता रहे थे। हालांकि सरकारी वकील ने उनके जमानत का विरोध किया है और कहा है कि उसे  जमानत देने से सामुदायिक शांति पर असर पड़ सकता है। अदालत इस मामले में गुरुवार को अपना फैसला सुनाएगी।

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