न्यायपालिका के मौजूदा हालात चिंताजनक और शर्मनाक: कपिल सिब्बल

एक इंटरव्यू में उन्होंने को कहा "पिछले कुछ वक़्त में इस संस्था के कई सदस्यों ने 'हमें नीचा दिखाया' और जिससे 'मेरा सिर शर्म से झुक गया' है"

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3 जुलाई 2022 @ 17:35
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नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद और जाने माने वकील कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका के मौजूदा हालात को चिंताजनक बताते हुए उसे शर्मनाक करार दिया है। 
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा, "पिछले कुछ वक़्त में इस संस्था के कई सदस्यों ने 'हमें नीचा दिखाया' और जिससे 'मेरा सिर शर्म से झुक गया' है।" उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में बोलने की आज़ादी और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जिस तरह से व्याख्या की, वो दुर्भाग्यजनक रहा। केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अभी आपातकाल जैसे हालात हैं और यहां संस्थानों का 'गला घोंटा' जा रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार केवल 'कांग्रेस मुक्त भारत' नहीं बल्कि 'विपक्ष मुक्त भारत' चाहती है। कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि क़ानून के शासन का हर रोज़ 'उल्लंघन' हो रहा है। ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर की हुई गिरफ़्तारी पर सिब्बल ने कहा कि इससे भी बड़ी चिंताजनक बात ये है कि न्यायपालिका के कई सदस्यों ने 'हमें निराश किया है।'उन्होंने कहा, "न्यायपालिका, जिसका मैं 50 सालों से हिस्सा रहा हूं, उसके कई सदस्यों ने हमें बहुत निराश किया है। मैं शर्म से अपना सिर झुका लेता हूं कि ऐसा हुआ है।"
मोहम्मद ज़ुबैर की गिरफ़्तारी होने और फिर अदालत का उन्हें ज़मानत देने से इनकार करने पर उन्होंने कहा कि चार साल पहले किए गए ट्वीट और उसके चलते बिना किसी सांप्रदायिक घटना के घटे उनकी गिरफ़्तारी होना 'अकल्पनीय' है। उन्होंने आगे कहा, "इससे अलावा, यह महसूस होने के बाद कि उनकी हिरासत को और बढ़ाना संभव नहीं है, तब जांच एजेंसी उन पर और आरोप लगा रही है, जिनका उनकी गिरफ़्तारी से कोई लेना-देना नहीं है। हम साफ़ तौर पर देख पा रहे हैं कि यह गिरफ़्तारी दुर्भावनापूर्ण है।"
कपिल सिब्बल ने कहा कि क़ानून के शासन की रक्षा के लिए बनाई गई संस्था जब इसके उल्लंघन पर भी अपनी आंखें मूंद लेती है, तो हमें अचरज होता है कि वो ऐसा उल्लंघन होने की अनुमति देती क्यों है। 

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