जबरन धर्मांतरण विरोधी बिल को पाकिस्तान की संसदीय समिति ने ख़ारिज कर दिया

पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री नूरुल हक़ क़ादरी ने कहा कि इस बिल को लेकर माहौल पक्ष में नहीं है

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14 अक्टूबर 2021 @ 11:49
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jabran dharmantran

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसदीय समिति ने जबरन धर्मांतरण विरोधी बिल को ख़ारिज कर दिया।  पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने इससे पहले इस प्रस्ताविक बिल का विरोध किया था।  अल्पसंख्यक समुदाय के सांसदों ने इस फ़ैसले का विरोध किया है। पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार डॉन और एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, जबरन धर्मांतरण से अल्पसंख्यकों बचाने वाला यह बिल चर्चा के लिए संसदीय समिति में आया था। इस चर्चा के दौरान ही पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री नूरुल हक़ क़ादरी ने कहा कि इस बिल को लेकर माहौल पक्ष में नहीं है। 
उन्होंने कहा कि अभी ऐसा माहौल नहीं है कि जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ कोई क़ानून बनाया जाए। अख़बार डॉन के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी कि जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया गया तो इससे शांति भंग होगी और अल्पसंख्यकों को दूसरी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।  नूरुल हक़ ने कहा कि क़ानून बनने के बाद अल्पसंख्यकों के साथ और बुरा होगा। 
उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकारें, नेशनल असेंबली के स्पीकर और प्रधानमंत्री कार्यालय अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं, जिनसे अल्पसंख्यकों का जबरन धर्मांतरण रुक सके।  उन्होंने कहा कि अलग से क़ानून लाना उनके लिए और मुश्किल हालात बनाने की तरह होगा।  पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मोहम्मद ख़ान ने कहा कि जबरन धर्मांतरण को लेकर प्रधानमंत्री एक विशेष संसदीय समिति पहले ही बना चुके हैं।  उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जबरन धर्मांतरण को लेकर गंभीर है।  जमात-ए-इस्लामी के सीनेटर मुस्ताक़ अहमद ने भी इस बिल का विरोध किया है।  उन्होंने इस बात को भी ख़ारिज कर दिया कि पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण की कोई समस्या है।  डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बिल इस्लाम विरोधी है। 
वहीं हिन्दू नेताओं ने इस बिल को ख़ारिज करने का विरोध किया है।  पीटीआई नेता लाल चंद ने कहा कि इस बिल का विरोध जिस तरह से किया जा रहा है, उससे ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण कोई समस्या नहीं है। 

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