नेपाल में 'महिला होने की वजह से' स्पीकर पद से हटाया

नेपाल की सबसे वरिष्ठ महिला राजनेताओं में से एक शिवमाया तुम्बाहाम्फे का कहना है कि उन्हें संसद के निचले सदन की स्पीकर पद से इसलिए हटाया गया क्योंकि वह महिला हैं. लेकिन वह हार मानने वाली नहीं हैं.

Share
Written by
पल पल न्यूज़ वेब डेस्क
5 फरवरी 2020 @ 14:51
पल पल न्यूज़ का समर्थन करने के लिए advertisements पर क्लिक करें
Removed from the post of 'woman' in Nepal

तुम्बाहाम्फे खुद को "पितृसत्ता की पीड़ित बताती हैं." नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा के स्पीकर कृष्ण बहादुर महारा को जब पिछले साल बलात्कार के आरोपों के बाद पद छोड़ना पड़ा तो तुम्बाहाम्फे ने कार्यवाहक स्पीकर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. लेकिन सत्ताधारी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें अपना पद छोड़ने को मजबूर किया ताकि किसी पुरुष को उनकी जगह स्पीकर बनाया जा सके.

राजनीति शास्त्र में डॉक्टरेट करने वाली तुम्बाहाम्फे का कहना है कि अब नेपाल में महिलाओं के लिए हालात राजशाही के दौर से भी बदतर हैं. नेपाल में 2008 की माओवादी क्रांति के बाद राजशाही को खत्म कर गणतांत्रिक व्यवस्था लागू की गई थी.

तुम्बाहाम्फे ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, "राजशाही के दौर से तुलना करें तो अब पितृसत्ता ने अपनी जड़ें ज्यादा गहरी जमा ली हैं. अब हमारे देश में वह कहीं ज्यादा मजबूत है." जब नेपाल में राजशाही खत्म हुई तो पहले से ज्यादा समान समाज का वादा किया गया था, खासकर ऐसे समुदायों के लिए जो सदियों से हाशिये पर थे. इनमें महिलाएं भी शामिल हैं. लेकिन यह वादा पूरा नहीं किया गया.

महिला अधिकार कार्यकर्ता 2015 में लागू किए गए नए संविधान के उस प्रावधान से खास तौर पर नाराज हैं जिसके तहत महिलाएं अपनी नागरिकता अपने बच्चों को नहीं दे सकती हैं. वहीं पुरूषों के लिए ऐसी कोई पाबंदी नहीं है.

वेबसाइट पर advertisement के लिए काॅन्टेक्ट फाॅर्म भरें