रनिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बने

पिछले संसदीय चुनाव में उनकी यूनाईटेड नेशनल पार्टी की अप्रत्याशित हार हुई थी एवं 226 सीटों वाली संसद में उनकी जमात का कोई भी सदस्य जीत दर्ज नहीं करा सका था

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ranil wickramasinghe

कोलम्बो: रनिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।  उन्हें गुरुवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।  पिछले दिनों महिंदा राजपक्षे ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।  श्रीलंका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है।  लंबे समय से श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं।  रनिल विक्रमसिंघे रिकॉर्ड छठी बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने हैं। 
विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री का पद स्वीकार करने को मना कर दिया था, क्योंकि वे गोटाबाया राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते पीएम नहीं बनना चाहते थे।  विपक्ष लंबे समय से राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की भी मांग कर रहे थे।  पूर्व पीएम महिंदा राजपक्षे ने रनिल विक्रमसिंघे को नया पीएम बनने पर बधाई दी है। 
इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।  हालाँकि उनके बेटे और सांसद नमल राजपक्षे ने ट्वीट करके ये कहा है कि उनका और उनके पिता का देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है और वे किसी भी जाँच में सहयोग के लिए तैयार हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में बाते गया है कि छठी बार प्रधानमंत्री बनने वाले रनिल विक्रमसिंघे श्रीलंका की राजनीति में एक अहम स्थान रखते हैं। हालाँकि, राजपक्षे बंधुओं के दौर में हुए पिछले संसदीय चुनाव में उनकी यूनाईटेड नेशनल पार्टी की अप्रत्याशित हार हुई थी।  उन्हें एक भी सीट पर जीत नहीं मिल सकी। 
मगर संसदीय सदस्यता की राष्ट्रीय सूची के आधार पर उनकी पार्टी को एक सीट आवंटित हुई।  इसी एक सीट के सहारे, 226 सीटों वाली संसद में विक्रमसिंघे संसदीय राजनीति में सक्रियता दिखाते रहे और अब उन्हें श्रीलंका में एक अभूतपूर्व संकट के दौर में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया है। पिछले दिनों इस्तीफ़ा देने वाले श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने विक्रमसिंघे को ट्विटर पर बधाई दी है। उन्होंने लिखा है- "नए नियुक्त प्रधानमंत्री को बधाई।  इस मुश्किल घड़ी में देश को चलाने के लिए आपको शुभकामनाएँ।"
रनिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका का प्रधानमंत्री बनने पर राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने भी ट्विटर पर बधाई दी है। उन्होंने लिखा है, "नए प्रधानमंत्री को मेरी शुभकामनाएं। रनिल विक्रमसिंघे ने मुश्किल समय में देश को चलाने के लिए कदम आगे बढ़ाया है। मैं श्रीलंका को फिर से मजबूत बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं"
रनिल विक्रमसिंघे का जन्म 24 मार्च 1949 को हुआ था। उनके पिता का नाम एसमंड विक्रमसिंघे और मां का नाम नलिनी विक्रमसिंघे है। 
उन्होंने कोलंबो के रॉयल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले वकालत की और बाद में राजनीति में क़दम रखा। 
1970 में उन्हें यूनाइटेड नेशनल पार्टी ने अपनी दो सीटों पर मुख्य व्यवस्थापक नियुक्त किया।  वो पहली बार बियागामा सीट से संसद पहुँचे और पूर्व प्रधानमंत्री जे आर जयवर्धने ने उन्हें अपनी कैबिनेट में मंत्री बनाया।  धीरे-धीरे पार्टी में उनका क़द बढ़ता गया। 
1 मई 1993 को श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति रनसिंघे प्रेमदासा की तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई। इसके बाद डी बी विजेतुंगा के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी। इसमें रनिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाया गया। 2001 में वो दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। 2015 में श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव हुआ जिसमें रनिल विक्रमसिंघे और मैत्रीपाल सिरिसेना की पार्टियों के गठबंधन को जीत मिली। सिरिसेना राष्ट्रपति बने और रनिल विक्रमसिंघे को एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी मिली। इसी साल श्रीलंका में संसद भंग कर दी गई और फिर से चुनाव हुए।  रनिल इसमें जीते और फिर एक बार प्रधानमंत्री बनाए गए। मगर 2015 से 2019 के बीच राजनीतिक अनिश्चितता रही और तब राष्ट्रपति सिरिसेना ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए, रनिल विक्रमसिंघे को हटाकर महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया।  लेकिन फिर हाई कोर्ट के एक फ़ैसले के बाद वो पाँचवीं बार प्रधानमंत्री बनाए गए। 
2019 में राष्ट्रपति चुनाव हुए और इसमें गोटाबाया राजपक्षे की जीत हुई। इसके बाद रनिल विक्रमसिंघे ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया। इसके बाद राजपक्षे दौर में हुए चुनाव में विक्रमसिंघे की पार्टी की क़रारी हार हुई। हालाँकि आवंटित सीट के बूते रनिल संसद के भीतर दाख़िल हुए। अब पिछले कुछ महीने से श्रीलंका में गहराए आर्थिक संकट के बीच रनिल विक्रमसिंघे छठीबार प्रधानमंत्री बनाए गए हैं। श्रीलंका के पत्रकार आर शिवराजा ने बीबीसी तमिल को बताया कि रनिल विक्रमसिंघे की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि वो आलोचनाओं का सामना करते हैं और अपना आपा नहीं खोते। 

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