अमेरिका में गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 50 साल पुराना फ़ैसला

कुछ सप्ताह पहले इस मामले के फ़ैसले से जुड़ा एक दस्तावेज़ लीक हुआ था जिसके बाद ये चर्चा शुरू हो गई थी कि कोर्ट इसके हक़ में फ़ैसला दे सकता है

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26 जून 2022 @ 01:28
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वाशिंगटन:अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फ़ैसले में गर्भपात को क़ानूनी तौर पर मंज़ूरी देने वाले पांच दशक पुराने फ़ैसले को पलट दिया है। माना जा रहा है कि इसके बाद अब महिलाओं के लिए गर्भपात का हक़ क़ानूनी रहेगा या नहीं इसे लेकर राज्य अपने-अपने अलग नियम बना सकते हैं। कोर्ट ने पचास साल पुरानेरो बनाम वेडमामले में आए फ़ैसले को पलट दिया है जिसके ज़रिए गर्भपात कराने को क़ानूनी करार दिया गया था और कहा गया था कि संविधान गर्भवती महिला को गर्भपात से जुड़ा फ़ैसला लेने का हक़ देता है। बीबीसी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ सप्ताह पहले इस मामले के फ़ैसले से जुड़ा एक दस्तावेज़ लीक हुआ था जिसके बाद ये चर्चा शुरू हो गई थी कि कोर्ट इसके हक़ में फ़ैसला दे सकता है। जानकार कहते हैं कि कोर्ट का ये फ़ैसला अमेरिका में गर्भपात के हक़ को बदल देगा क्योंकि इसके बाद हर राज्य अब इसे लेकर अपने नियम बना सकेगा। 
माना जा रहा है कि इसके बाद आधे से अधिक अमेरिकी राज्य गर्भपात क़ानून को लेकर नए प्रतिबंध लागू कर सकते हैं। 13 राज्य पहले ही ऐसे क़ानून पारित कर चुके हैं जो गर्भपात को ग़ैरक़ानूनी करार देते हैं, ये क़ानून सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद लागू हो जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि कुछ और राज्य भी जल्द इससे जुड़े प्रतिबंध लागू कर सकते हैं, जबकि कई राज्य महिलाओं को गर्भपात से जुड़ा हक़ देने वाले नियम लागू कर सकते हैं। 
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी संस्था प्लान्ड पेरेन्टहुड के एक शोध के अनुसार इसके बाद अनुमानित 3.6 करोड़ महिलाओं के लिए गर्भपात की सुविधाओं तक पहुंच बाधित हो सकती है। 
सुप्रीम कोर्ट डॉब्स बनाम जैकसन महिला स्वास्थ्य संगठन मामले में सुनवाई कर रही थी, जिसमें 15 सप्ताह से अधिक की उम्र के भ्रूण के गर्भपात को लेकर लगाई पाबंदी को चुनौती दी गई थी। 
इस मामले में कोर्ट ने 06-03 वोट से राज्य सरकार के हक़ में फ़ैसला दिया था और एक तरह से गर्भपात को लेकर महिलाओं को मिले संवैधानिक हक़ को ख़त्म कर दिया। कोर्ट के आदेश में एक जगह पर लिखा है, "हम मानते हैं कि गर्भपात कराने का हक़ संविधान प्रदत्त नहीं है... और गर्भपात के नियमन को लेकर फ़ैसला लोगों और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथों में होना चाहिए।"
ये सुप्रीम कोर्ट के खुद के ही दिए पुराने फ़ैसले के विपरीत है और अभूतपूर्व है। माना जा रहा है कि इसके बाद अलग-अलग राज्यों के बीच राजनीतिक संघर्ष एक अलग स्तर तक पहुंच सकता है और पूरा देश इस मामले में विभाजित दिख सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिकी उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने गुरुवार को कई राज्यों के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरलों से मुलाक़ात की है और गर्भपात के हक़ के पक्ष में चर्चा की है। 
पेन्सिल्वेनिया, मिशिगन और विस्कॉनसिन जैसे राज्यों में गर्भपात के मुद्दे पर लोगों की राय बेहद कम मार्जिन से बंटी हुई है, और यहां ये क़ानूनी हक होगा या नहीं ये फ़ैसला हर चुनाव के बाद बदल सकता है। दूसरे राज्यों में इसे लेकर नए मुद्दों पर क़ानूनी जंग छिड़ सकती है जैसे गर्भपात के लिए नागरिक राज्य से बाहर जा कर सुविधाएं ले सकते हैं या नहीं, क्या गर्भपात के लिए मेल से दवा मंगाई जा सकती है। कैलिफोर्निया, न्यू मेक्सिको और मिशिगन जैसे राज्यों के डेमोक्रेटिक गवर्नर पहले ही रो बनाम वेड मामले के पलटने की सूरत में अपने राज्य के संविधानों के भीतर गर्भपात का हक़ सुनिश्चित करने की योजना की घोषणा कर चुके हैं। 

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