फ़लीस्तीनी पर इसराइली हमले में 6 बच्चों सहित 31 की मौत 

सऊदी अरब, ईरान, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर जैसे इस्लामिक देशों ने की निंदा

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7 अगस्त 2022 @ 16:51
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नई दिल्ली: फ़लीस्तीनी समूह इस्लामिक जिहाद यानी पीआईजे के ख़िलाफ़ गज़ा में की गई इसराइली कार्रवाई में अब तक 31 फ़लीस्तीनियों के मारे जाने और 260 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की ख़बर है। अल जज़ीरा ने यह जानकारी दि है। मरने वालों में छह बच्चे भी शामिल हैं।मरने वालों में पीआईजे नेता तासीर जब्बारी सहित कई लड़ाके और छह बच्चे भी शामिल हैं। इधर बीबीसी की रिपोर्ट मे कहा गया है कि  इसराइल की ताज़ा कार्रवाई के बाद इस्लामी देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसराइल को इसके नतीज़े भुगतने की धमकी दी है।  बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब, ईरान, पाकिस्तान, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर जैसे इस्लामिक देशों ने इसराइल की ताज़ा कार्रवाई पर फ़लीस्तीन के प्रति अपना गहरा समर्थन भी जताया है। 
सऊदी अरब ने फ़लीस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन जताते हुए गज़ा पर इसराइल की ताज़ा कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर जारी बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ताज़ा संघर्ष को ख़त्म करने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा है कि वे गज़ा के आम लोगों को सुरक्षा मुहैया कराएं।  उसने दोनों देशों के बीच दशकों से जारी इस विवाद को ख़त्म करने की भी अपील की है। 
वहीं ईरान ने गज़ा पर 'क्रूर हमले' की निंदा करते हुए और फलीस्तीनियों को अपना समर्थन दिया है।  ईरान ने कहा है कि इसराइल के ख़िलाफ़ लड़ाई में वो अकेला नहीं है। 
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी ने कहा है कि इसराइल ने एक बार फिर दुनिया को अपना प्रभाव जमाने वाले और आक्रामक स्वभाव दुनिया को दिखाया है। 
अल-जज़ीरा के अनुसार ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख मेजर जनरल हुसैन सलामी ने एक न्यूज़ वेबसाइट से यह बात कही है। 
उन्होंने कहा, ''यरुशलम को मुक्त कराने और फलीस्तीनियों के हक़ को बनाए रखने के लिए काम करने वाले यहूदी विरोधी सभी जिहादी शक्तियां आज एकजुट हैं। ''
ईरान की राजधानी तेहरान के दौरे पर गए इस्लामिक जिहाद के नेता जियाद अल नखला से उन्होंने कहा, ''हम अंत तक इस राह पर आपके साथ हैं।  आप फ़लीस्तीन और फलीस्तीनियों को बताएं कि वे अकेले नहीं हैं। ''
सलामी ने कहा है कि फ़लीस्तीन के जवाब से पता चलता है कि वहाँ एक नया अध्याय शुरू हो गया है और हाल के अपराध के लिए इसराइल को भारी क़ीमत चुकानी होगी।  उनके अनुसार, फ़लीस्तीन का प्रतिरोध आज पहले की तुलना में कहीं मज़बूत है। 
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी इसराइल के ताज़ा हमले की कड़ी निंदा की है। 
पाकिस्तान के अनुसार, इसराइल के ताज़ा हमले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और मानवीय क़ानूनों की पूरी अवहेलना करते हुए दशकों से बेगुनाह फ़लीस्तीनियों के साथ हो रहे इसराइली अत्याचार, उसके अवैध कार्य और अंधाधुंध बल प्रयोग का नमूना है। 
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ट्वीट में लिखा कि यह इसराइली चरमपंथ की ताज़ा कार्रवाई है।  उन्होंने लिखा, ''यदि सज़ा से बचाव और बर्बरता का कोई चेहरा होता तो इसराइल का ही होता, जिसने बिना नतीज़ों की परवाह किए फलीस्तीनियों को अपना निशाना बनाया। ''
वहीं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है, ''इसराइल अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग, फलीस्तीनी लोगों को अपने काबू में करने के साथ उसके हक़ के लिए और इसराइली कब्जे को खत्म करने के लिए खड़े होने वालों को अलग-थलग करने के लिए कर रहा है। ''
उन्होंने लिखा, ''हम बहादुर फलीस्तीनी लोगों के साथ खड़े हैं और वैश्विक ताक़तों से अपनी चुप्पी तोड़ने और फ़लीस्तीनी लोगों पर इसराइल के किए गए अत्याचारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग करते हैं।  शांति केवल एक व्यावहारिक दो देश के सूत्र से ही आ सकती है। ''
उधर मिस्र ने कहा है कि वह दोनों देशों के साथ मिलकर दिन रात काम कर रहा है ताकि हालात और न बिगड़े और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल हो। 
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सिसि ने काहिरा में एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा, ''हमने हालात को क़ाबू से बाहर न जाने देने और लड़ाई रोकने के लिए दिन रात हर किसी से संपर्क किया है। ''
वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने गज़ा पट्टी में शांति बहाली की ज़रूरत बताते हुए ताज़ा तनाव को घटाने और आम लोगों की ज़िंदगी बचाने पर ज़ोर दिया है। 
यूएई के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में ताज़ा संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताते हुए ताज़ा हिंसा और अस्थिरता रोकने के लिए अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई है। 
यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल का सदस्य होने के नाते यूएई ने चीन, फ्रांस, आयरलैंड और नॉर्वे के साथ मिलकर इस मसले पर सोमवार को सिक्यॉरिटी काउंसिल की बैठक बुलाने के लिए एक आवेदन दिया है। 
उसकी मांग है कि इस बैठक में क्षेत्र के ताज़ा हालात पर चर्चा हो और शांति बहाली के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों का समर्थन दिया जा सके। 
क़तर ने गज़ा पर इसराइल की ताज़ा कार्रवाई को 'आक्रामक' बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। 
क़तर के विदेश मंत्रालय ने दुनिया से तुरंत पहल करने की अपील की है ताकि आमलोगों ख़ासकर महिलाओं और बच्चों पर हो रहे हमले रूके। 
इस बाबत जारी एक बयान में क़तर ने 'फ़लीस्तीनी मुद्दे, वहाँ के लोगों के उचित हक़ और 1967 में तय की गई सीमा के अनुसार उनके आज़ाद मुल्क, जिसकी राजधानी यरुशलम है, के साथ न्याय करने को लेकर अपना समर्थन दिया है। 

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