बांग्लादेश में आम जनता का  सड़कों पर हिंसक विरोध-प्रदर्शन

पेट्रोल के दाम 51.7 फ़ीसदी और डीजल के दाम 42. 5 फ़ीसदी बढ़ा दिए के कारण आम लोगों का गुस्सा फूट पाड़ा

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7 अगस्त 2022 @ 17:40
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ढाका: बांग्लादेश में पेट्रोल और डीजल के दाम में हुई भारी बढ़ोतरी के बाद देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। आपको बाता दें कि शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल के दाम 51.7 फ़ीसदी और डीजल के दाम 42. 5 फ़ीसदी बढ़ा दिए थे। इसके बाद लोग गाड़ियां लेकर पेट्रोल-पंपों की ओर चल पड़े। बीबीसी का कहना है कि बांग्लादेश में हुआ विरोध प्रदर्शन इतना उग्र था कि कई शहरों में आगज़नी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। शनिवार को तेल के बढ़े हुए दाम लागू होने से पहले बड़ी संख्या में लोग देश भर के पेट्रोल पंपों पर पहुँच गए।  पेट्रोल पंपों पर बड़ी-बड़ी लाइनें लग गईं और अफ़रातफ़री का माहौल बन गया। इसे देखते हुए कुछ पेट्रोल पंपों ने पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री बंद कर दी और उसके बाद विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पेट्रोल-डीजल के दाम में इस भारी बढ़ोतरी से लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ा है। 
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति में दिक्क़त होने से बांग्लादेश भी प्रभावित है।  यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। बांग्लादेश में ऊर्जा संकट का असर बिजली की आपूर्ति पर भी पड़ा है। देश के कुछ इलाकों में 13 घंटों तक बिजली कटौती करनी पड़ी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ बांग्लादेश की 416 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था सालों से दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था रही है। 
हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा और खाद्य कीमतों ने देश के आयात बिल को बढ़ा दिया है, जिससे सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित अन्य वैश्विक एजेंसियों से कर्ज लेना पड़ रहा है।  

इधर देश के ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक बाज़ार की स्थिति को देखते हुए तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को जुलाई तक छह महीनों में आठ अरब टका का नुक़सान झेलना पड़ा है। ऊर्जा मंत्री नसरुल हामिद ने कहा, ''नई क़ीमतों का भार सभी नहीं उठा सकते।  लेकिन, हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। लोगों को धैर्य रखना होगा। ''उन्होंने कहा कि वैश्विक कीमतें गिरने पर देश में तेल की कीमतों में बदलाव किया जाएगा। वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के महासचिव मिर्ज़ा फख़रुल इस्लाम अलमगिर ने इसे लोगों के जख़्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है। उन्होंने कहा कि कीमतें बढ़ने से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर होगा। बांग्लादेश की महंगाई दर लगातार पिछले नौ महीनों से छह प्रतिशत बनी हुई थी जो जुलाई में बढ़कर 7. 48 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, हाल के हफ़्ते में तेल की वैश्विक कीमतों में कमी आई है। शुक्रवार को तेल की कीमतें फरवरी के बाद सबसे कम स्तर पर थीं। 

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