पोलैंड में धर्म के दबाव में महिलाओं से छिना गर्भपात का अधिकार

पोलैंड की संवैधानिक अदालत ने फ़ैसला सुनाया है कि भ्रूण विकार के मामले में गर्भपात असंवैधानिक है। ये आदेश देश में दक्षिणपंथी कट्टरपंथी वर्गों के लिए ख़ुशी का पल है

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27 अक्टूबर 2020 @ 11:08
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पोलैंड की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है कि अब से देश  में गर्भपात गैरकानूनी माने जायेंगे।पोलैंड  में पहले भ्रूण में किसी भी तरह के दोष पाए जाने पर कानून के तहत गर्भपात करवाए जा सकते थे लेकिन इस फैसले के बाद गर्भपात पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.देश में गर्भपात से जुड़े  कानून पहले से ही पूरे यूरोप में सबसे सख्त थे लेकिन इस फैसले के बाद बलात्कार, अनाचार( incest )या माँ की सेहत से जुड़े खतरे को देखकर ही गर्भपात की अनुमति दी जाएगी.यूरोपीय मानवाधिकार आयोग ने इस फैसले को 'महिलाओं के अधिकारों की दृष्टि से इसे एक  दुखद दिन' बताया है.गर्भपात के कड़े नियमों के कारण गर्भपात की चाह रखने वाली 80,000 से 120,000 पोलिश महिलाएं हर साल दूसरे देशों में जाकर गर्भपात करवाती हैं.इस फैसले के बाद गर्भपात करवाने के लिए दूसरे देशों में जाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और उन पर  और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जायेगा.साफ़ है पोलैंड में महिलाओं के अधिकारों की दृष्टि से हालात बद से बदतर होने जा रहे हैं.

पोलैंड में सभी तरह के गर्भपात पर लगे प्रतिबंधों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. पोलैंड की सत्तारूढ़ सत्तारूढ़ पार्टी के नेता जारोस्लाव कैस्कीस्की के घर के पास गुस्साई पोलिश जनता ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। लोग चिल्लाते हुए कह रहे थे  कि यह सरकार महिलाओं के लिए नरक का निर्माण कर रही है.शुक्रवार को पोलैंड के  प्रधान मंत्री माट्यूज़ मोरवीकी ने  कोरोना के चलते बड़े पैमाने पर सार्वजानिक प्रदर्शनों के बंद की घोषणा की लेकिन गुरुवार शाम को प्रदर्शनकारी उप प्रधान मंत्री जारोस्लाव कैस्कीस्की के घर के बाहर इकट्ठा हुए जिन पर पुलिस ने मिर्च का स्प्रे किया और उसके बाद 15 लोगों को हिरासत में ले लिया.पोलैंड के एक शहर वुड्ज (lodz )में शुक्रवार शाम को महिलाओं के अधिकारों का अंतिम संस्कार आयोजित किया गया था वहीँ फेसबुक पर "कुछ दिनों में इस देश में महिलाओं के लिए नरक शुरू हो जाएगा,शीर्षक से एक विरोध प्रदर्शन से जुड़े  कार्यक्रम का काफी प्रचार हो रहा है.इस कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों से सभी प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक को ब्लॉक करने का अनुरोध किया गया है.

पिछले सालों में पहले से ही सख्त कानून को और ज्यादा सख्त करने की कोशिशों ने एक बड़े विरोध आंदोलन को जन्म दिया जिसमें लाखों महिलाओं ने काले कपडे पहनकर प्रमुख पोलिश शहरों में मार्च किया.पोलैंड में यूरोप के अन्य देशों की तुलना में कैथोलिक धर्म सत्ता के फैसलों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है.कैथोलिक समूह गर्भपात को लेकर सख्त कानून लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं और इस बार वे सफल भी हो गए हैं.चर्च के नेताओं ने पोलैंड सरकार के इस कदम का स्वागत भी किया है.ट्रिब्यूनल के आर्कबिशप मारेक जोड्रेसवेस्की ने तो न्यायाधीशों के इस साहसी कदम की प्रशंसा की ह

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