लखनऊ की कैब वाली घटना और फेमिनिस्ट होने के बीच संबंध- दिव्यांशी कुसुम

लखनऊ में कैब ड्राइवर के साथ हिंसा करने वाली लड़की प्रियदर्शनी ने जो हरकत की उसकी जितनी निंदा की जाए कम है।

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6 अगस्त 2021 @ 11:26
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#ArrestLucknowGirl

लखनऊ में कैब ड्राइवर के साथ हिंसा करने वाली लड़की प्रियदर्शनी ने जो हरकत की उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। इस हरकत ने उस कैब ड्राइवर को मानसिक रूप से जितनी क्षति पहुंचाई है शायद हम और आप इस घटना को देखते हुए वह महसूस नहीं कर सकते वह व्यक्ति आने वाले समय में किस तरह से इस घटना को लेकर परेशान रहेगा इसका आप और हम सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते हैं।

हमारे लिए बस यह एक वायरल घटना है लेकिन उस व्यक्ति के लिए यह ता उम्र ना भूल पाने वाली घटना होगी। हम जिस समाज में रहते हैं वहां पुरुषों के कंधों पर पहले ही मर्दानगी का इतना बोझ डाल दिया जाता है कि वे चाह कर भी इस दिखावटी खोल से बाहर नहीं आ पाते। ना खुलकर अपनी कमियों को स्वीकार कर सकते हैं ना उनके साथ हिंसा होने पर कह पाते है। वीडियो में यह अच्छी तरह से देखा जा सकता है कि लड़की किस प्रकार से हिंसा पर हिंसा किए जा रही है। अगर आप उस पूरे वीडियो को ध्यान से देखें तो लड़की की शारीरिक गतिविधियां उसके बोलने का अंदाज और हिंसा की प्रवृत्ति से साफ होता है कि वह मानसिक रुप बीमार है जिसके लिए उसे इलाज की जरूरत है।

लड़की के थोड़ी देर के फ्रर्सट्रेशन ने उस व्यक्ति के लिए उस घटना को ताउम्र का घाव बना दिया है जो समय-समय पर रिसता रहेगा। कैब ड्राइवर का आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है साथ ही साथ उसकी भारी मानसिक क्षति हुई है। भारतीय समाज पितृसत्ता के ही अधीन रहा है यहां पुरुषों को स्त्रियों के ऊपर हमेशा दबदबा बनाना सिखाया जाता है इस घटना को देखने पर यह प्रतीत होता है कि यहां कैब ड्राइवर पुरुष होने के बावजूद अपनी सहनशक्ति को बनाये रखता है इसके लिए उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। शायद ये उसके संस्कार ही होंगे कि इतना अपमान सहने के बावजूद उसने आत्म सुरक्षा में भी लड़की पर हाथ नही उठाया। वरना जिस आवेश में लड़की हिंसा कर रही है अपने पक्ष में कोई भी व्यक्ति बचाव कर सकता है।

सोशल मीडिया पर भी अभी तक अधिक लोगों को उस लड़की की गलती पर उसे कोसते और निंदा करते हुए ही देखा है लेकिन एक तबका ऐसा भी है कि कुछ लोग इस तरीके की पोस्ट भी सोशल मीडिया पर कर रहे हैं कि यह लड़की फेमिनिस्ट है अब फेमिनिस्ट चुप क्यों है? फेमिनिस्ट थी इसलिए ऐसा कर गई? ऐसी ही होती है फेमिनिस्ट? वगैरह-वगैरह....जो लोग इस मुद्दे को फैमिनिस्ट से जोड़कर देख रहे हैं मैं उनसे सिर्फ इतना पूछना चाहती हूं क्या सिर्फ लड़की होना आप फेमिनिस्ट होना समझते हैं? क्या इस लड़की ने कभी किसी महिला सशक्तिकरण के लिए आवाज उठाई है? यकीनन वह सोशल प्लेटफॉर्म पर होगी आप उसकी वॉल पर चेक करे क्या वह अपने किसी भी पोस्ट, रोजमर्रा के जीवन मे महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाती हुई नजर आती है? किसी महिला की निंदनीय हरकत को आप कैसे फेमिनिस्ट होने के साथ जोड़ सकते हैं? या बस जो महिला उग्र है उन्हें आप फेमिनिस्ट मानते हैं?

अगर आपको लगता है कि एक महिला का पुरुष पर अत्याचार करना या शारीरिक हिंसा करना फेमिनिस्ट होने के सांचे में आता है तो आपकी सोच शोचनीय है। नारीवादी सिद्धांत का लक्ष्य लैंगिक असमानता को समझना और लैंगिक राजनीति शक्ति संबंधों और लैंगिकता पर विचार करना है। फेमिनिस्ट होने का सही अर्थ है महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिले ना कम ना ज्यादा। अभी आपको फेमिनिस्ट पर अत्यधिक पढ़ने की जरूरत है। ताकि आप महिला सशक्तिकरण को पहचान पाए जिसके लिए महिला सशक्तिकरण यानी फेमिनिस्ट शब्द का उदय हुआ है।

अब प्रश्न उठता है कि किसी स्त्री का स्त्रीवादी होना आखिर कुछ लोगो को खलता क्यों है? क्यों बर्दाश्त नही होता? आखिर क्यों उन्हें बस किसी भी तरह दोषारोपण करके फैमिनिस्ट महिलाओं को कटघरे में खड़ा करना होता है?? जानते हैं क्यों.... क्योंकि स्त्रीवादी सोच पितृसत्ता के पुराने खाचें पर कील ठोकने का काम करती है। इसलिए पितृसत्ता के पोषकों को यह डर हमेशा बना रहता है कि कहीं सभी स्त्रियां अपने हुकूको के लिए एक साथ खड़ी ना हो जाए। पितृसत्ता के पोषक सत्ताधारी हर वह हथकंडा अपनाना चाहते हैं जिससे बोलती पढती आगे बढ़ती औरतें चुप हो जाएं डर जाये।

आज सोशल मीडिया पर महिलाओं का अच्छा खासा वर्ग अपनी बात को सबके समक्ष रखने में सक्षम है वे पूरे जोश होश और तथ्यों के साथ अपनी बात रखती हैं। आप इन स्त्रीवादी महिलाओं की तुलना एक महिला द्वारा किये गये निंदनीय कार्य से जोड़ कर नही देख सकते हैं अगर आप देखते हैं तो इसी मे आपकी घबराहट,द्वेष, झुंझलाहट और शातिरपना साफ नजर आ जाता है।

इस पूरी घटना में बात जेंडर की है ही नहीं बात है सही या गलत की। इस घटना में एक महिला के द्वारा एक पुरुष के साथ गलत व्यवहार किया गया है जिसके लिए अपराध कर्ता को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। नारीवादी विचारधारा कभी भी गलत का साथ नही देती है। गलत को गलत और सही को सही कहने के साथ ही नारीवादी विचारधारा हर क्षेत्र में लैंगिक समानता पर जोर देती है।

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