जेएनयू के हिंसा की कहानी व्हाट्सएप इनवाइट लिंक की जुबानी

बीबीसी ने व्हाट्सएप के इन स्क्रीन शॉट में दिख रहे मोबाइल नंबर मिलाए और ये जानने की कोशिश कि आखिर ये कौन लोग हैं और इस घटना से इनका क्या संबंध है

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12 जनवरी 2020 @ 21:19
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दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार शाम की हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप चैट के कुछ स्क्रीन शॉट वायरल हो रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि छात्रों के साथ मारपीट की ये घटना सुनियोजित थी और इसकी प्लानिंग व्हाट्सएप ग्रुप्स के ज़रिए की गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन स्क्रीन शॉट्स में कई तरह के मैसेज देखे जा सकते हैं. इनमें किस रास्ते जेएनयू में घुसा जाए, इसके बाद कहां जाया जाए, क्या किया जाए जैसी बातों पर चर्चा चल रही है. कुछ मैसेज इस तरह हैं :

"कैसा रहा आज का मैच??"

"जेएनयू में हमने बहुत मज़ा किया. मज़ा आ गया, उन देशद्रोहियों को मार के."

"अबतक बढ़िया. गेट पर कुछ करना चाहिए. बताएं क्या किया जाए."

"क्या करना है."

"लोग जेएनयू के समर्थन में मेन गेट पर आ रहे हैं. वहां कुछ करना है क्या?"

"कर सकते हैं."

"पुलिस तो नहीं आ गई."

"भाई इस ग्रुप में लेफ्टिस्ट आगए."

"नहीं. वीसी ने एनट्री मना किया है. अपना वीसी है."

ऐसे कई वायरल व्हाट्सएप चैट के स्क्रीन शॉट्स में देखे जा सकते हैं.वहीं एबीवीपी की ओर से भी व्हाट्सएप चैट का एक स्क्रीन शॉट शेयर किया जा है.जिसमें कुछ लोग हिंसा की बात करते हुए देखे जा सकते. ये लोग एक दूसरे को कॉमरेड कह रहे हैं और इनके नाम के साथ वामपंथी संगठनों का नाम लिखा हुआ है.

हालांकि इस चैट में कोई नंबर नज़र नहीं आ रहा. सिर्फ़ मैसेज करने वालों के नाम दिखते हैं. इसलिए बीबीसी इनसे संपर्क नहीं कर सका.

कुछ वायरल व्हाट्सएप चैट के स्क्रीन शॉट्स में नंबर भी नज़र आ रहे हैं. बीबीसी ने जब True Caller ऐप के ज़रिए स्क्रीन शॉट में दिख रहे फ़ोन नंबरों को चेक किया तो पाया कि वे नंबर उन्हीं नामों से रजिस्टर्ड हैं जो स्क्रीन शॉट में दिख रहे हैं.

सात लोगों के नाम चेक करने पर सही पाए गए जबकि एक व्यक्ति जिसके नाम के आगे स्क्रीन शॉट पर एबीवीपी लगा था, उसे चेक करने पर INC पाया गया. ऐसा करना संभव है, अगर कुछ लोग आपका नंबर नाम बदलकर सेव करें तो ऐसा हो सकता है.

बीबीसी ने व्हाट्सएप के इन स्क्रीन शॉट में दिख रहे मोबाइल नंबर मिलाए और ये जानने की कोशिश कि आखिर ये कौन लोग हैं और इस घटना से इनका क्या संबंध है.

इन चैट्स में दो तरह के नंबर हैं. एक वो जो ग्रुप में मैसेज कर रहे हैं और इनके मैसेज पढ़कर ये लग रहा है कि सक्रिय हैं और योजनाएं बना रहे हैं.दूसरे तरह के नंबर वो हैं जिनके आगे यह लिखा हुआ देखा जा सकता है कि वे लोग "इनवाइट लिंक के ज़रिए ग्रुप" में शामिल हुए हैं.

किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन एक लिंक शेयर कर लोगों को ग्रुप में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर सकता है, लिंक के ज़रिए आने वालों को परमिशन की ज़रूरत नहीं होती.व्हाट्सएप स्क्रीन शॉट में दिख रहे नंबर हमने एक-एक करके मिलाया. पहली तरह के नंबर यानी जिनके ज़रिए मैसेज लिखे जा रहे थे, उनमें से अधिकतर बंद मिले.

उनमें से सिर्फ़ एक नंबर पर हमारी बात हो सकी. ये नंबर हर्षित शर्मा का है, जो खुद को जेएनयू का छात्र बताते हैं. उनका दावा है कि मारपीट की घटना के दौरान वो कैंपस में नहीं थे. वो बताते हैं, "कैंपस के व्हाट्सएप ग्रुप्स में इस घटना की चर्चा शुरू हो गई. वहां ये भी एक मैसेज आया कि आरएसएस या एबीवीपी का एक ग्रुप है. जिसका इनवाइट लिंक भी दिया गया था और कहा गया कि यहां ये लोग योजना बना रहे हैं. उस वक्त उस ग्रुप में 50-60 छात्र थे. उस वक्त ये हॉस्टल में घुसे थे और वहां लोगों को मार रहे थे."

"हममें से कई जेएनयू के छात्र उस इनवाइट लिंक पर क्लिक करके ग्रुप में शामिल हो गए, ताकि जान सकें कि उनकी आगे की प्लानिंग क्या है."

"हमने देखा कि उस ग्रुप का नाम "यूनिटी अगेंस्ट लेफ्टिस्ट" था. उस वक्त रात के साढ़े नौ बज रहे थे. वो लोग एक दूसरे को मैसेज कर रहे थे. तभी अचानक उनके ग्रुप में मेरी तरह 100 से 150 अनजान लोग शामिल हो गए. तब उन्होंने कहा कि इस ग्रुप में बहुत सारे लेफ्टिस्ट आ गए हैं. इसके बाद उन्होंने ग्रुप में मैसेज करना बंद कर दिया."

ग्रुप में शामिल कई लोगों का कहना है कि इस दौरान बार-बार ग्रुप का नाम बदलता रहा. कभी "यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट, एबीवीपी मुर्दाबाद, एबीवीपी ज़िंदाबाद, लेफ्टिस्ट डूब मरो."

जब हर्षित से पूछा गया कि उन्होंने ग्रुप में एक मैसेज भी किया था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया. वो मैसेज क्या था? इस पर वो कहते हैं कि "जब ग्रुप में बात हो रही थी कि वो लोग गेट पर आ रहे हैं. मेरे कई सारे दोस्त गेट पर थे, इसलिए मैंने इस चैट का स्क्रीन शॉट लेकर अपने दूसरे दोस्तों को भेजा. इस बीच गलती से मैंने वो स्क्रीन शॉट उसी ग्रुप में भी डाल दिया. वही स्क्रीन शॉट मैंने डिलीट किया था."

ग्रुप इनवाइट लिंक के ज़रिए आए हुए दूसरे लोगों ने भी यही दावा किया कि उन्हें इनवाइट लिंक का स्क्रीन शॉट किसी व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया पर मिला. जिसके बाद उन्होंने ये जानने के लिए ग्रुप ज्वाइन किया कि क्या प्लानिंग चल रही है.

विवादित व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीन शॉट में कई ऐसे लोग भी हैं, जो खुद को केरल, कर्नाटक, गुजरात जैसे जगहों से बता रहे हैं. बिहार के रहने वाले एक लड़के ने तो कहा कि वो तो कभी दिल्ली तक नहीं आया है और ना ही जेएनयू में किसी को जानता है.

कुछ लोगों का कहना था कि वो गलती से ग्रुप में शामिल हो गए. वहीं कुछ का कहना था कि एक जागरुक नागरिक होने के नाते उन्हें ऐसा करना ज़रूरी लगा ताकि पता लगाया जा सके कि "वो लोग आगे क्या करने वाले हैं."

हालांकि इनमें जेएनयू में पढ़ने वाले कई लोगों के नंबर भी हैं. जो हर्षित जैसी ही बात कह रहे हैं कि वो सिर्फ ये देखने के लिए ग्रुप में शामिल हुए कि क्या प्लानिंग चल रही है. जेएनयू में फ़ारसी भाषा की पढ़ाई करने वाले एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उनके डिपार्टमेंट के ग्रुप में भी इनवाइट लिंक आया था, जिस पर उन्होंने क्लिक कर दिया. लेकिन चैट पढ़ने के बाद उन्हें गड़बड़ लगी तो उन्होंने ग्रुप तुरंत छोड़ दिया. ऐसे ही जेएनयू के एक और छात्र ने कहा कि उनके पास भी ऐसी ही एक लिंक आई थी जिसके नीचे लिखा हुआ था कि देखिए एबीवीपी क्या प्लानिंग कर रहा है. यही देखने के लिए मैंने क्लिक कर दिया था. ये छात्र उसी साबरमती हॉस्टल के हैं जहां तोड़फोड़ हुई है.

कई बाहरी लोग भी इस ग्रुप में शामिल थे. जिनमें से कुछ का कहना है कि वो ना तो जेएनयू से हैं और ना छात्र हैं.एक महिला ने बीबीसी से कहा कि वो कई सारे प्रोटेस्ट ग्रुप्स में शामिल हैं. वहीं उन्हें ये इवाइट लिंक मिला. वो उन लोगों की प्लानिंग का पता लगाने के लिए ग्रुप में शामिल हो गई थीं.

भवदीप नाम के एक शख्स का दावा है कि वो पत्रकार हैं और वो भी ग्रुप चैट देखने के लिए इनवाइट लिंक के ज़रिए ग्रुप में गए थे. उनका कहना है कि अब भी इस ग्रुप में करीब ढाई सौ लोग शामिल हैं. वहीं आदित्य कहते हैं कि उन्हें किसी और ने ग्रुप में ऐड कर दिया था. वो ना तो जेएनयू के छात्र हैं और ना ही कोई खास राजनीतिक विचारधारा रखते हैं. हालांकि वो कहते हैं कि वो घटना में शामिल कई लोगों को जानते हैं. उनका दावा है कि इस घटना में दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले कुछ प्रोफेसर भी शामिल हैं.

कुछ ऐसा ही आशीष भी कहते हैं, जो जेएनयू में पी एचडी थर्ड के छात्र हैं लेकिन वो इस विवादित व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन भी हैं. कई सारे एडमिन में एक उनका भी नाम है.

हालांकि उनका कहना है कि उन्हें किसी और ने ग्रुप में ऐड कर दिया और एडमिन बना दिया, जबकि वो तो कैंपस में थे ही नहीं.

वो कहते हैं, "मैं घटना की रात घर से वापस लौटा हूं. मैं रात को दस बजे जेएनयू पहुंचा. और पांच घंटे बाहर खड़ा रहा. मेरा इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है."

इन सभी लोगों का कहना है कि इन्हें घटना की रात से ही लगातार फोन आ रहे हैं, जिनमें से कई लोग इन्हें धमकियां भी दे रहे हैं और उनकी लोकेशन के बारे में पूछ रहे हैं. जिससे ये लोग डरे हुए हैं.

(लेख बीबीसी के संवाददाता है यह आलेख बीबीसी हिंदी डाट काम में प्रकाशित हुई है)

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