आरे जंगल की जंग पहुंची सुप्रीम कोर्ट,पेड़ों की कटाई पर सोमवार को तत्काल प्रभाव से रोक

बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मेट्रो कार शेड के लिए मुंबई के प्रमुख हरित क्षेत्र आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से शनिवार को इनकार कर दिया था.

Share
Written by
7 अक्टूबर 2019 @ 16:48
are forest

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई पर सोमवार को तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए काटे जा रहे आरे कालोनी में पेड़ों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सर्वोच्च अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को पेड़ काटने पर रोक लगाने को कहा है, अदालत ने कहा कि अभी जितने पेड़ कट गए तो ठीक लेकिन आगे पेड़ नहीं कटेंगे.सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि यह (आरे फॉरेस्ट) एक इको-सेंसटिव जोन है या नहीं। इस इलाके में विकास कार्य नहीं किए जा सकते थे, इसलिए हमें दस्तावेज दिखाएं। साथ ही कहा है कि इस मामले में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी पार्टी बनाया जाए। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी, तब तक यथास्थिति बनाए रखें।
इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जरूरत के मुताबिक पेड़ काट लिए गए हैं, अब आरे कॉलोनी में और कटाई नहीं होगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले सभी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा किया जाए। 
अदालत ने इस दौरान महाराष्ट्र सरकार से संजय गांधी वन के स्टेटस के बारे में पूछा और आदेश दिया कि आप अभी कोई भी पेड़ नहीं काटेंगे, इस मामले की सुनवाई अब 21 अक्टूबर को होगी. अदालत ने कहा कि सवाल ये नहीं है कि एक फीसदी पेड़ कटे हैं या ज्यादा, जो गलत है वो गलत है. अदालत के इस आदेश पर महाराष्ट्र सरकार ने भरोसा दिया है कि अब वह कोई पेड़ नहीं काटेंगे.

इससे पहले लॉ स्टूडेंट्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने सीजेआई को पत्र सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की अपील की थी। उधर मुंबई में गिरफ्तार 29 प्रदर्शनकारियों को हॉलीडे कोर्ट से जमानत मिलने पर ठाणे जेल से रिहा कर दिया गया। लेकिन, अदालत ने शर्त रखी है कि ये लोग अब किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।

छात्रों की ओर से संजय हेगड़े ने कहा कि आरे को जंगल घोषित करने का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पेंडिंग चल रहा है. वरिष्ठ वकील गोपाल ने कहा कि आरे का मसला काफी पुराना है, 1999 में SC ने जंगल की परिभाषा घोषित करने की बात कही थी. लेकिन महाराष्ट्र की ओर से इसपर परिभाषा नहीं दी गई. जब आरे मेट्रो प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई, तब संजय गांधी वन को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की मांग हुई थी.वकील की ओर से बताया गया कि महाराष्ट्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर इस क्षेत्र को संवेदनशील माने जाने से इनकार किया,जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप नोटिफिकेशन दिखाइए. सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से महाराष्ट्र सरकार का नोटिफिकेशन दिखाने की मांग की, जिसमें आरे कॉलोनी का जिक्र है.वकील गोपाल शंकर नारायण ने SC में कहा कि आरे कॉलोनी को 2012 में फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया था. इस दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने उनसे ग्रीन ज़ोन की जानकारी मांगी.

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रिशव रंजन रिशव ने बताया था कि पत्र में सीजेआई को लिखा गया- मुंबई के फेफड़ों की हत्या हो रही है। आरे कॉलोनी में इनकी कटाई रुकवाइए। जब हम आपको यह पत्र लिख रहे हैं, तब मुंबई में मीठी नदी के किनारे स्थित आरे फॉरेस्ट के पेड़ काटे जा रहे हैं। खबरों के अनुसार अभी तक 1,500 पेड़ों को काटा जा चुका है। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एमएमआरसी) और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई (एमसीजीएम) की गतिविधियों पर नजर रख रहे हमारे साथियों को जेल भेज दिया गया है। वे अपने माता-पिता से भी बात नहीं कर पा रहे हैं।’

रिशव ने कहा- हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट तत्काल पेड़ों की कटाई पर रोक लगाए, जिससे 2700 पेड़ों में से कम से कम कुछ पेड़ों को बचाया जा सके। कार शेड आरे कॉलोनी में 33 एकड़ जमीन पर बनाया जा रहा है। यह मीठी नदी के किनारे स्थित है, जिसकी कई उपधाराएं और नहरें हैं। ये नहीं रहेंगी, तो मुंबई में बाढ़ आ सकती है। इसमें 3,500 पेड़ हैं जिनमें से 2,238 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव रखा गया है। सवाल यह है कि एक ऐसा जंगल जो नदी किनारे है और जिसमें 3,500 पेड़ हैं, उसे एक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग के लिए क्यों चुना गया।.
यह जमीन पर संघर्ष कर रहे लोगों की बड़ी जीत है , साथी ही सोशल मिडिया के जरिये जागरूकता और प्रतिरोध का स्वर बुलंद करने वालों के इये भी हौंसला है /

Click on the ad to support Pal Pal News