नई दिल्ली, 10 अगस्त 2025 — चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार के Special Intensive Revision (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और वे “क्लीन हैंड्स” से अदालत में नहीं आए हैं। आयोग ने कहा कि इन पर भारी लागत (Heavy Costs) लगाई जानी चाहिए।
कानून में वजह बताने की अनिवार्यता नहीं
ECI ने स्पष्ट किया कि कानून उन्हें यह बाध्यता नहीं देता कि वे ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में जिन लोगों के नाम शामिल नहीं हैं, उनके नाम हटाने या न जोड़ने का कारण साझा करें या प्रकाशित करें। आयोग का कहना है कि नॉन-इंक्लूज़न के कारणों के साथ सूची जारी करने से कोई व्यावहारिक लाभ नहीं है।
‘डिलीटेड वोटर्स’ की लिस्ट मांगने का हक़ नहीं
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को कहा, “याचिकाकर्ता डिलीटेड वोटर्स की लिस्ट बतौर हक़ नहीं मांग सकते।”
नाम छूटने पर क्या करें मतदाता?
ECI के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का नाम 1 अगस्त 2025 को जारी ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में नहीं है, तो वह दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान अपना दावा पेश कर सकता है।
नाम छूटना = डिलीशन नहीं
ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट रोल से नाम छूटना इसका मतलब नहीं कि उस व्यक्ति का नाम स्थायी रूप से इलेक्टोरल रोल से हटा दिया गया है। ड्राफ्ट रोल केवल यह दिखाता है कि एन्यूमरेशन फेज़ में मौजूदा मतदाताओं का भरा हुआ फ़ॉर्म प्राप्त हुआ है या नहीं। चूँकि यह काम बड़े पैमाने पर और मानवीय हस्तक्षेप के साथ होता है, इसलिए भूलवश नाम छूटना या ग़लती से शामिल होना संभव है।
