पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्ची 4 जुलाई को घर से बाहर निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिवार द्वारा रातभर तलाश के बाद 5 जुलाई की सुबह उसका शव गांव के एक तालाब से बरामद हुआ। परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि बच्ची का अपहरण किया गया, उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही होगी।
घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने बारुईपुर–जयनगर मार्ग जाम कर दिया और सियालदह–नामखाना रेल लाइन पर भी विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान भीड़ ने एक स्थानीय व्यक्ति को आरोपी मानते हुए पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई क्षेत्रों में निषेधाज्ञा लागू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। अब तक मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं-एक बच्ची की हत्या की जांच के लिए और दूसरी भीड़ हिंसा, पुलिस पर हमले तथा तोड़फोड़ के मामले में। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है, जबकि विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने तथा कानून को अपना काम करने देने की अपील की है।
