रेस में नहीं, तकनीक में जीते दुनिया के दिल: भारतीय छात्रों की इलेक्ट्रिक बोट इनोवेशन ने मोनाको में रचा इतिहास

तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (KCT) के छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। कॉलेज की 12 सदस्यीय टीम ‘सी शक्ति’ (Team Sea Sakthi) ने फ्रांस के मोनाको में आयोजित 13वें मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज में प्रतिष्ठित ‘प्रिंस अल्बर्ट II ऑफ मोनाको फाउंडेशन सस्टेनेबल यॉटिंग टेक्नोलॉजी अवार्ड’ अपने नाम किया।

इस उपलब्धि के साथ टीम को 25,000 यूरो यानी लगभग ₹27 लाख रुपये की ग्रांट भी मिली।यह प्रतियोगिता केवल नाव की रफ्तार की नहीं, बल्कि भविष्य की टिकाऊ समुद्री तकनीक (Sustainable Marine Technology) को लेकर थी।

भारतीय छात्रों ने एक स्वदेशी इलेक्ट्रिक बोट डिजाइन की थी, जिसमें उन्होंने बैटरी की सुरक्षा और तापमान नियंत्रण के लिए एक खास बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया।

इस तकनीक में पैराफिन और एक्सपेंडेड ग्रेफाइट जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इलेक्ट्रिक बोट की बैटरी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।प्रतियोगिता में दुनिया भर की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज की टीमें शामिल थीं।

हालांकि रेस के दौरान टीम की नाव को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा और वह रेस पूरी नहीं कर सकी, लेकिन जजों ने उनकी तकनीकी क्षमता और पर्यावरण अनुकूल समाधान को सबसे प्रभावशाली माना। इसी आधार पर उन्हें सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी का सर्वोच्च सम्मान दिया गया।

यह उपलब्धि भारत में छात्र नवाचार और स्वदेशी तकनीक की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। टीम अब मिली हुई ग्रांट का उपयोग अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने और भविष्य में इसे व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने की योजना बना रही है।

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