20वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, NEET विवाद पर जंतर-मंतर से संसद मार्च की तैयारी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को 20वें दिन में प्रवेश कर गया। डॉक्टरों ने उनकी गिरती सेहत को लेकर चिंता जताई है और लगातार मेडिकल निगरानी की जा रही है।

चिकित्सकों के अनुसार, लंबे उपवास के कारण वांगचुक का वजन करीब 9.5 किलो तक कम हो चुका है। उनका स्वास्थ्य कमजोर हुआ है और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर अनशन जारी रहा तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद वांगचुक ने कहा कि वह छात्रों की मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

जंतर-मंतर पर समर्थकों को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि शरीर से कमजोर होने के बावजूद उनका हौसला मजबूत है। उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को होने वाले शांतिपूर्ण संसद मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह मार्च लोकतंत्र के मंदिर तक छात्रों की आवाज पहुंचाने का प्रयास होगा।

इस आंदोलन को पिछले कुछ दिनों में कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक हस्तियों का समर्थन मिला है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के मुद्दों का समर्थन किया, जबकि आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल भी वांगचुक से मुलाकात कर चुके हैं।

समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव समेत कई अन्य नेताओं ने भी सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की है।NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहा छात्र संगठन CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) अब अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

संगठन ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया है। यह मार्च संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित किया जाएगा।प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय व मानसिक स्वास्थ्य सहायता शामिल हैं।इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी केंद्र और दिल्ली सरकार को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने कहा है कि उनकी हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और सभी की नजर 20 जुलाई के संसद मार्च पर टिकी हुई है।

यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है या आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।

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