मुंबई में प्रदर्शन की इजाज़त नहीं मिली तो ‘जेल भरो’-2 अक्टूबर से पहले CJP का आंदोलन क्यों हुआ और बड़ा?

2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती पर मुंबई से शुरू होने वाले Cockroach Janta Party (CJP) के प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन आगे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। हालांकि, मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस ने शिवाजी पार्क से जुड़े न्यायिक आदेशों, प्रशासनिक नियमों, संभावित ट्रैफिक बाधा और शोर से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। इसके बाद CJP ने प्रदर्शन को ‘Jail Bharo Andolan’ में बदलने की घोषणा की।

CJP का आंदोलन उस विवाद के बीच तेज हुआ है जिसमें Indian Express की एक जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में SIR यानी Special Intensive Revision के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और वोटर डेटाबेस से जुड़े फैसलों पर उनके सवालों का उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं को “unauthorised” और “illegal” बताया था। Form 6 में नए मतदाताओं से पुराने SIR रिकॉर्ड में अपने, माता-पिता या दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगने वाले बदलाव पर भी आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

SIR को लेकर CJP का आरोप है कि इससे बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हुए हैं। हालांकि, 13 करोड़ से अधिक लोगों के “मताधिकार छिन जाने” का दावा CJP की राजनीतिक व्याख्या है। उपलब्ध रिपोर्ट में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्राफ्ट वोटर रोल से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का उल्लेख है, लेकिन ड्राफ्ट से नाम हटना अपने-आप स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है। ECI ने भी SIR से जुड़े फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिया गया बताया है।
इसी बीच चुनाव आयोग ने SIR नोटिस प्रक्रिया में कुछ राहत दी है।

महाराष्ट्र में unmapped electors और logical discrepancies वाले मामलों में BLO अब घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINET पर अपलोड कर सकते हैं। ऐसे मतदाताओं को सामान्य तौर पर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए ERO कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। आयोग ने युवा और पहली बार वोट देने वाले लोगों समेत छूटे हुए नामों को continuous updation के जरिए शामिल कराने की प्रक्रिया भी दोहराई है।

CJP को आंदोलन के लिए सार्वजनिक समर्थन भी मिला है। सोनम वांगचुक ने 27 सितंबर को CJP के 2 अक्टूबर के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि साफ-सुथरी चुनाव प्रक्रिया देश की बड़ी जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हर आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकते, इसलिए मुंबई प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी तय नहीं है।

शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी दीपके के प्रदर्शन आह्वान का समर्थन किया और सोशल मीडिया पोस्ट में 2 अक्टूबर को मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की बात कही। दूसरी ओर, INDIA ब्लॉक के नेताओं की 30 सितंबर को दिल्ली में बैठक प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की खबर है।

इस तरह 2 अक्टूबर से पहले मामला केवल एक प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ CJP इस्तीफा, SIR पर रोक और चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग के साथ ‘Jail Bharo’ का रास्ता अपना रही है, वहीं दूसरी तरफ ECI अपने फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है। अब मुंबई में 2 अक्टूबर को प्रशासन, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच यह टकराव किस रूप में सामने आता है, यही इस पूरे विवाद का अगला बड़ा अध्याय होगा।

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