लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के गठबंधन को सामाजिक न्याय, जाति जनगणना और संविधान रक्षा के मुद्दों पर जनता का समर्थन मिला, जिससे कांग्रेस की सीटें एक से बढ़कर छह हो गईं। अब कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करने की रणनीति बनाई है।
इसके तहत, पार्टी के प्रदेश महासचिव अनिल यादव ने पश्चिम और पूर्वांचल के 25 जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में संगठनात्मक ढांचे में सुधार की योजना बनाई गई और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की गई। साथ ही, कांग्रेस से जुड़े वोटबैंक का आकलन भी किया गया। इसके लिए संबंधित जिलों के सक्रिय पदाधिकारियों को टास्क दिए गए हैं। ये पदाधिकारी विधानसभा क्षेत्रवार कांग्रेस की मौजूदा स्थिति, वोटबैंक, जातिगत आंकड़ों और पिछले पांच चुनावों के हार-जीत के अंतर का विश्लेषण करेंगे, और पार्टी के लिए उपयुक्त मुद्दों की पहचान करेंगे।
दूसरे चरण में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय इन जिलों का दौरा करेंगे और इस दौरान सक्रिय पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां और बढ़ाई जाएंगी।
विधानसभा सीटों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें करीब 175 सीटों को पहली श्रेणी में रखा जाएगा। सपा के साथ गठबंधन के लिए इन सीटों की मांग की जा सकेगी।
पार्टी की योजना है कि हर जिले की कम से कम दो विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार उतारे जाएं। अजय राय ने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया जा रहा है और सक्रिय नेताओं को संगठन और चुनाव दोनों में अवसर प्रदान किया जाएगा। अगले महीने से जिलेवार दौरे शुरू किए जाएंगे।
सामाजिक न्याय के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को भी कांग्रेस प्राथमिकता दे रही है। अजय राय ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सड़क से सदन तक संघर्ष का ऐलान किया है, और यूपी में भी कांग्रेस जनता के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय है। अगले महीने से विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों पर भी आंदोलन शुरू किए जाएंगे, जहां भी जनता का शोषण होगा, कांग्रेस वहां विरोध प्रदर्शन करेगी।
