मंगलवार को अमेरिका की एक अपीलीय अदालत ने गूगल को एक नए मुकदमे का सामना करने का आदेश दिया है। आरोप है कि गूगल ने गूगल क्रोम उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी बिना उनकी अनुमति के एकत्र की। ये उपयोगकर्ता चाहते थे कि उनका ब्राउजर उनके गूगल खाते से जुड़ा न हो।
सैन फ्रांसिस्को की सर्किट अदालत ने कहा कि निचली अदालत के न्यायाधीश को यह जांचने के लिए कहना चाहिए था कि क्या गूगल क्रोम यूजर्स ने ऑनलाइन ब्राउज़ करते समय गूगल को अपना डेटा एकत्र करने की अनुमति दी थी।
पिछले साल गूगल ने एक मुकदमे के सिलसिले में अरबों डेटा को नष्ट करने के लिए समझौता किया था। इस मुकदमे में दावा किया गया था कि अल्फाबेट की इकाई ने उन यूजर्स को ट्रैक किया, जो गोपनीय मोड में ब्राउज़ कर रहे थे, जिसमें गूगल क्रोम का इनकोग्निटो मोड भी शामिल है। मंगलवार को अदालत ने इस मामले में 3-0 का फैसला सुनाया।
गूगल और उनके वकीलों ने अभी तक अदालत के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूजर्स के वकील मैथ्यू वेसलर ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट हैं और अब मुकदमे की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
इस मामले में वे क्रोम यूजर्स शामिल हैं, जिन्होंने 27 जुलाई, 2016 के बाद अपने ब्राउजर को गूगल खाते से नहीं जोड़ा था। यूजर्स का कहना है कि गूगल और क्रोम को गोपनीयता की नीति का पालन करना चाहिए और क्रोम का उपयोग करने के लिए निजी जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। गूगल को तब तक जानकारी नहीं मिलनी चाहिए थी जब तक ‘सिंक’ का फंक्शन चालू न हो।
निचली अदालत के जज ने कहा था कि गूगल की सामान्य गोपनीयता नीति लागू होती है, क्योंकि कंपनी यूजर्स की जानकारी किसी भी ब्राउजर से एकत्र कर सकती है, भले ही वे कोई भी ब्राउजर इस्तेमाल कर रहे हों।
