यूपी में कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सपा को लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता मिली थी, जिससे अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की उम्मीदें पाल ली थीं। लेकिन अब कांग्रेस ने उनके इन सपनों पर पानी फेर दिया है। सूत्रों के अनुसार, सपा ने कांग्रेस से हरियाणा विधानसभा चुनाव में 3 से 5 सीटें मांगी हैं और इंडिया अलायंस के तहत कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती है। सपा का लक्ष्य हरियाणा में यादव और मुस्लिम वोट बैंक के बल पर जीत हासिल करना है और दक्षिण हरियाणा की मुस्लिम और यादव बहुल सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने की योजना है। हालांकि, कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने सपा की इस मांग को अस्वीकार कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस न तो आम आदमी पार्टी और न ही इंडिया अलायंस के किसी अन्य दल से समझौता करेगी। कांग्रेस अपने बलबूते पर सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हुड्डा का कहना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत कम हुआ, जबकि कांग्रेस का मत प्रतिशत बढ़ा और उसने 5 सीटें भी जीतीं। हुड्डा का कहना है कि राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है और इसलिए कांग्रेस को अपनी ताकत पर भरोसा है। हालांकि, इंडिया अलायंस में किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत की पुष्टि नहीं हो रही है, और हुड्डा के करीबी इस पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
यूपी में भी 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, और यदि हरियाणा के मुद्दे पर दोनों दलों के बीच विवाद बढ़ता है, तो इसका असर यूपी में भी पड़ सकता है। अखिलेश यादव ने अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर अवधेश प्रसाद के बेटे को टिकट दिया है। यूपी उपचुनाव की 10 सीटों में से कांग्रेस 3 सीटों पर गंभीरता से तैयारी कर रही है, लेकिन हरियाणा को लेकर तनाव बढ़ने से यूपी में सपा-कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व सपा की मांग को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
मध्यप्रदेश के चुनाव में भी सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर विवाद देखने को मिला था, जहां कमलनाथ ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। चुनाव के बाद की समीक्षा में यह पता चला कि कम से कम 2 सीटें सपा के उम्मीदवारों के कारण कांग्रेस हार गईं। सपा हरियाणा में चुनाव लड़कर अपनी राष्ट्रीय स्थिति मजबूत करना चाहती है, और सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं।
