दिल्ली दंगे से जुड़े एक अहम मामले में शाहरुख़ पठान समेत 10 आरोपियों को कोर्ट ने बाइज़्ज़त बरी कर दिया है। यह फैसला तब आया जब कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत पर्याप्त नहीं थे और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह के दायरे में आ गए।
केस की पृष्ठभूमि
2020 में दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान इन आरोपियों पर दंगे फैलाने, हिंसा करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। शाहरुख़ पठान का नाम खासतौर पर उस समय सुर्खियों में आया जब उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें उन्हें एक पुलिसकर्मी की तरफ बंदूक तानते हुए देखा गया था। इस घटना के बाद उन्हें हिंसा भड़काने और अन्य गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए वीडियो फुटेज, चश्मदीद गवाहों के बयान और अन्य सबूत आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत के तौर पर पेश नहीं किए जा सके। गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते थे, और वीडियो फुटेज की सत्यता पर भी संदेह व्यक्त किया गया।
कोर्ट ने इस मामले में शाहरुख़ पठान और अन्य 9 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ किसी भी तरह के सबूत से अपराध साबित नहीं हो सका है। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत हर व्यक्ति निर्दोष तब तक माना जाता है जब तक कि उसके खिलाफ ठोस सबूत पेश न हो।
वकील की प्रतिक्रिया
शाहरुख़ पठान के वकील ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाया गया था और उन्हें राजनीतिक दबाव का शिकार बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच में कई खामियां छोड़ी थीं, जिसके कारण उनका मुवक्किल और अन्य आरोपी लगभग तीन साल तक जेल में रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की आलोचना की है, जबकि बीजेपी ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि कानून का सम्मान सभी को करना चाहिए।
आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत के लोगों को गिरफ्तार किया और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, बीजेपी ने कहा है कि अदालत ने अपना फैसला दे दिया है और इसे सभी को स्वीकार करना चाहिए।
आगे की राह
इस फैसले के बाद शाहरुख़ पठान और अन्य आरोपी अब जेल से रिहा हो जाएंगे। यह मामला दिल्ली दंगे से जुड़े कई और मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां कई अन्य आरोपी भी कोर्ट में अपने खिलाफ लगे आरोपों का सामना कर रहे हैं।
