राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की 11% हिस्सेदारी, सेबी कार्रवाई के बीच शेयरों में 5% गिरावट

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ज्वेलरी निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब कंपनी पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की जांच चल रही है।

स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 से अब तक LIC ने राजेश एक्सपोर्ट्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 10.80% से 11.18% के बीच बनाए रखी है। हालांकि, कंपनी के शेयरों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि फरवरी 2023 के उच्चतम स्तर से यह करीब 90 प्रतिशत तक टूट चुका है।

मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर राजेश एक्सपोर्ट्स का मार्केट कैप लगभग ₹3,068 करोड़ है। इस हिसाब से कंपनी में LIC की हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹340 करोड़ बैठता है।

सेबी की जांच के दायरे में कंपनी

सेबी ने हाल ही में राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता को पूंजी बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक का आरोप है कि कंपनी ने वित्तीय आंकड़ों को लेकर भ्रामक जानकारी दी, आवश्यक खुलासों में चूक की और जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं किया।

सेबी की प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपनी सहायक कंपनियों से जुड़े लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नियामक के अनुसार, यह राशि कथित तौर पर कंपनी द्वारा दिखाए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्सा थी।

सेबी का कहना है कि इन खुलासों से निवेशकों के सामने कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार का आकार वास्तविकता से कहीं अधिक मजबूत दिखाया गया।

कंपनी ने आरोपों से किया इनकार

राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी ने कोई वित्तीय अनियमितता नहीं की है। कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और यह मामला नियामक तथा कंपनी के बीच संचार संबंधी गलतफहमी का परिणाम हो सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

कंपनी में LIC की बड़ी हिस्सेदारी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी ने राजेश एक्सपोर्ट्स में इतनी बड़ी हिस्सेदारी क्यों बनाए रखी और क्या इस निवेश पर पर्याप्त निगरानी रखी गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की जांच और शेयरों में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की नजर अब इस मामले के अगले घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

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