ईरान और इज़राइल के बीच दुश्मनी कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1979 की ईरानी क्रांति के बाद हुई, जब ईरान की नई सरकार ने इज़राइल को मान्यता देने से इनकार कर दिया। तब से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सैन्य और वैचारिक टकराव लगातार बढ़ता गया। इज़राइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान लंबे समय से फ़िलिस्तीन के समर्थन और इज़राइल की नीतियों के विरोध में रहा है।
2026 में यह तनाव खुली सैन्य भिड़ंत में बदल गया, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए इज़राइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद संघर्ष तेजी से पूरे मध्य-पूर्व में फैल गया।
इस संघर्ष में सीधे तौर पर ईरान, इज़राइल और अमेरिका शामिल हैं, लेकिन इसका प्रभाव कई अन्य देशों तक पहुंच चुका है। ईरानी हमलों और सैन्य गतिविधियों का असर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, इराक, लेबनान और यहां तक कि साइप्रस तक देखा गया है।
वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति गुजरती है। संघर्ष के कारण यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा।
यह युद्ध केवल मध्य-पूर्व की समस्या नहीं है। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप जैसे देशों को तेल आयात के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता है। तेल महंगा होने पर पेट्रोल, डीजल, गैस, परिवहन, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो जाती हैं। विशेषज्ञों ने खाद्य संकट और महंगाई बढ़ने की भी चेतावनी दी है।
वैश्विक शेयर बाजारों पर भी इसका असर दिखा है। एशिया और यूरोप के कई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि ऊर्जा संकट की आशंका से कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
यह संघर्ष एक बार फिर दिखाता है कि आज की दुनिया कितनी आपस में जुड़ी हुई है। मध्य-पूर्व में शुरू हुआ युद्ध भारत के पेट्रोल पंप, यूरोप की फैक्ट्रियों, अफ्रीका के खाद्य बाजारों और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं तक असर डाल सकता है। इसलिए ईरान-इज़राइल संघर्ष केवल दो देशों का युद्ध नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय संकट बन चुका है।
