उत्तर प्रदेश के मेरठ में 8 जुलाई 2026 को हुआ पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है। मामला 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम
की हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।जानकारी के अनुसार, ललिता गौतम 15 मई 2026 को कॉलेज परीक्षा देने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। अगले दिन उनका शव गन्ने के खेत में मिला। पुलिस ने मामले में एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिलने के बाद ललिता के परिवार और सामाजिक संगठनों ने जांच पर सवाल उठाए।
8 जुलाई को करीब 100 लोगों ने मेरठ कमिश्नरेट और कलेक्ट्रेट गेट के पास प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखना चाहते थे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया।मामला तब और गंभीर हो गया जब SSP Avinash Pandey का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में कथित तौर पर उन्हें प्रदर्शनकारियों पर हाथ उठाते और एक पुलिस वाहन के अंदर मौजूद व्यक्ति के साथ मारपीट करते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे।
पुलिस वाहन में मौजूद व्यक्ति की पहचान वकील और कार्यकर्ता रवि गौतम के रूप में बताई गई, जो पीड़ित परिवार का समर्थन कर रहे थे। घटना के बाद पुलिस ने दावा किया कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।वहीं, प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस पर बल प्रयोग और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं।
कई राजनीतिक नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।फिलहाल यह मामला पुलिस कार्रवाई, नागरिक अधिकारों और न्याय की मांग के बीच बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।
