मानसून की पहली मार में गाजियाबाद बेहाल: गड्ढे, करंट और बंद नालों ने ली लोगों की जान

गाजियाबाद में 8 से 10 जुलाई 2026 के बीच हुई भारी बारिश ने शहर की तैयारियों और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ ही घंटों की बारिश के बाद सामने आई घटनाओं ने दिखा दिया कि मानसून से पहले की तैयारियां कितनी कमजोर थीं।

वसुंधरा सेक्टर-13 स्थित अटल चौक के पास सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे एक कार और स्कूटर करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सड़क के पास चल रहे निर्माण कार्य और मिट्टी के कटाव को इसकी वजह माना जा रहा है। बारिश का पानी कमजोर जमीन में पहुंचने से सड़क की नींव प्रभावित हुई।

वहीं, इंदिरापुरम के ज्ञान खंड इलाके में जलभराव के बीच करंट फैलने से 22 वर्षीय युवक नरेंद्र की मौत हो गई। बताया गया कि पानी के संपर्क में आए बिजली उपकरणों और ट्रांसफॉर्मर क्षेत्र के कारण यह हादसा हुआ। स्थानीय लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद होने तक पानी के पास जाने में खतरा महसूस किया।

विजय नगर इलाके में भी एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां जलभराव के कारण सड़क और नाले का अंतर दिखाई नहीं दिया और एक बच्ची की डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा लोनी बॉर्डर क्षेत्र में सड़क पर शव मिलने की घटना ने खुले नालों और सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या केवल बारिश की नहीं बल्कि कमजोर शहरी नियोजन की है। कई इलाकों में एक साथ चल रहे निर्माण कार्य, विभागों के बीच तालमेल की कमी, अधूरे सड़क कार्य और नालों की खराब सफाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

गाजियाबाद में नगर निगम, विकास प्राधिकरण और बिजली विभाग जैसे कई संस्थानों की जिम्मेदारी होने के बावजूद आपसी समन्वय की कमी आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन रही है।

मानसून हर साल आता है, लेकिन हर बार जलभराव और हादसे यह सवाल छोड़ जाते हैं कि आखिर तैयारी पहले क्यों नहीं होती?

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