सात मोड़’ में 4,369 पेड़ों पर संकट: हाईवे परियोजना को लेकर उत्तराखंड में तेज़ हुआ पर्यावरण आंदोलन

उत्तराखंड के देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर स्थित ‘सात मोड़’ क्षेत्र इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच टकराव का केंद्र बना हुआ है। भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश NH-07 फोर/सिक्स लेन परियोजना के तहत लगभग 20 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए 4,369 पेड़ों को प्रभावित किया जाना है, जिनमें 3,605 परिपक्व पेड़ों की कटाई और 754 के प्रत्यारोपण की योजना है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या में 100 से 200 वर्ष पुराने साल के पेड़ शामिल हैं, जो राजाजी टाइगर रिजर्व और हाथी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। उनका आरोप है कि परियोजना से वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग बाधित होंगे और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।

दूसरी ओर, NHAI का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक, चारधाम यात्रा और सड़क हादसों को देखते हुए यह परियोजना आवश्यक है। एजेंसी का दावा है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एलीफेंट अंडरपास, साउंड बैरियर और क्षतिपूरक वनीकरण जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी। इस बीच पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने परियोजना को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है।

हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक आगे न बढ़ाए जाने के बाद पेड़ों की कटाई तेज हो गई, जबकि अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हरेला पर्व के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘काला हरेला’ मनाकर विरोध दर्ज कराया और कई स्थानों पर लोग पेड़ों से चिपककर ऐतिहासिक चिपको आंदोलन की याद दिलाते नजर आए।

यह विवाद अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की नीति को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।

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