संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर से शुरू हुआ ‘संसद चलो’ मार्च बड़े टकराव में बदल गया। CJP के नेतृत्व में हजारों NEET-UG अभ्यर्थी, छात्र और नागरिक संसद की ओर बढ़े, जहां भारी पुलिस बंदोबस्त, बैरिकेडिंग और सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इस दौरान 180 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है, जिनमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। वहीं दिल्ली पुलिस का दावा है कि 118 पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हुए। दूसरी ओर, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रहे सोनम वांगचुक का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा।
उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में उन्हें निजी अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की, जिस पर अदालत में सुनवाई हुई। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव, CPI के डी. राजा सहित कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई।
उधर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने CJP प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा का भरोसा दिया, लेकिन संगठन ने इसे “बेकार बैठक” बताते हुए ठोस आश्वासन न मिलने का आरोप लगाया।
फिलहाल CJP ने संसद मार्च रोकने का फैसला किया है, हालांकि जंतर-मंतर पर धरना जारी रहेगा और विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद में उठाने की घोषणा की है।
